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कोटद्वार के ग्रास्टनगंज में हाथियों का आतंक, घरों और पेयजल लाइनों को नुकसान

कोटद्वार के ग्रास्टनगंज में हाथियों का आतंक, घरों और पेयजल लाइनों को नुकसान

उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रास्टनगंज में हाथियों के झुंड के आवासीय इलाके में घुस आने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों के बीच भारी भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। उन्होंने संबंधित वन विभाग से तुरंत और ठोस कदम उठाने की जोरदार मांग की है। जंगली जानवरों की इस प्रकार की गतिविधियों ने आम जनजीवन को काफी हद तक अस्त-व्यस्त कर दिया है और लोग अपनी तथा अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं।

कोटद्वार के ग्रास्टनगंज में हाथियों का आतंक, घरों और पेयजल लाइनों को नुकसान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगली हाथियों के इस झुंड ने अपने इस तांडव के दौरान कई आवासीय मकानों में तोड़फोड़ की और उन्हें नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही हाथियों ने क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति लाइनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस तबाही और नुकसान के कारण स्थानीय निवासियों को इन दिनों पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन और रोजमर्रा के कार्य काफी अधिक प्रभावित हुए हैं। पानी की इस अचानक कमी और घरों को पहुँचे नुकसान ने आम जनता की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है।

क्षेत्रवासियों में दहशत और सुरक्षा की मांग

इस अप्रिय घटना के सामने आने के बाद पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने प्रभावित इलाके का व्यक्तिगत तौर पर दौरा किया और वहां हुए नुकसान का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और उनकी सभी समस्याओं को बहुत ध्यान से सुना। इस दौरान नागरिकों ने अपनी जनजीवन और संपत्ति की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने की गुहार लगाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उनके घरों के आसपास के इलाकों में अक्सर हाथी और गुलदार जैसे खतरनाक जंगली जानवर घूमते हुए नजर आते रहते हैं। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी अधिक खतरनाक और डरावनी बन चुकी है। अभिभावक इस निरंतर बने रहने वाले डर के कारण अपने बच्चों को घरों से बाहर भेजने में बहुत कतराते हैं। लगातार बने रहने वाले इस वन्यजीव खतरे की वजह से बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता हमेशा गहरे संकट और आशंका में रहते हैं।

स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर

ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का यह स्पष्ट मानना है कि इस गंभीर समस्या से पूरी तरह निपटने के लिए केवल पिंजरे लगाना ही काफी नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में मांग की है कि वन विभाग को इस इलाके में अपनी गश्त को काफी बढ़ा देना चाहिए। साथ ही, निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से पूरी तरह रोका जा सके।

क्षेत्र में लगातार बढ़ रही वन्यजीवों की आवाजाही से लोग बेहद परेशान हैं। निवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से विनम्र आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान निकालें, जिससे वे लोग एक सुरक्षित माहौल में अपना जीवन व्यतीत कर सकें।