नेपाल में भारी बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे सौ से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। नेपाल के अनुरोध पर भारत एक विशेष सुरंग बचाव दल और चिकित्सा टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। इस भीषण आपदा के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मची है और संपर्क मार्ग भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत कार्यों में बड़ी बाधा आ रही है। नेपाल सरकार की अपील पर यह राहत कदम उठाया जा रहा है ताकि इस संकट से निपटा जा सके।


क्या होती है रैट-होल माइनिंग तकनीक और इसके कार्य करने का तरीका?
रैट-होल माइनिंग एक ऐसी विशेष बचाव तकनीक है जिसमें विशेषज्ञ कर्मी बेहद संकरे और चूहे के बिल जैसे रास्तों के जरिए अंदर प्रवेश करते हैं। इसके बाद वे फावड़े, कुदाल और अन्य छोटे हाथों के औजारों की मदद से मिट्टी या चट्टानों को हटाकर मलबे को धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं। इस तरह की पद्धति का उपयोग तब किया जाता है जब भारी ड्रिलिंग मशीनें खराब हो जाती हैं, मलबा गिरने का अंदेशा रहता है या सुरंग के दोबारा ढंसने का गंभीर खतरा बना रहता है। भारतीय विशेषज्ञों को इस प्रकार के कठिन पर्वतीय और सुरंग अभियानों का पहले भी व्यापक अनुभव रहा है।

उत्तराखंड के सिलक्यारा हादसे से मिला था अहम अनुभव
भारतीय सेना और इंजीनियरों के पास हिमालयी क्षेत्रों में जटिल बचाव कार्यों का लंबा अनुभव है। इससे पहले इस दल ने उत्तराखंड के चमोली जनपद के सिलक्यारा में हुए हादसे के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय बारह नवंबर को सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद सत्रह दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे इकतालीस मजदूरों को इसी विशेष तकनीक और हाथ से खुदाई के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला गया था। उस अभियान के दौरान भी इंजीनियरों और रैट-होल माइनर्स ने मेटल पाइप के अंदर जाकर चट्टानों को काटकर रास्ता बनाया था। अब इसी सिद्ध विशेषज्ञता और अनुभव का उपयोग पड़ोसी देश नेपाल में चल रहे राहत अभियान में किया जाएगा ताकि वहां फंसे लोगों की जान बचाई जा सके।

त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे हैं लोग
नेपाल के रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के भीतर सौ से अधिक लोग फंसे हुए हैं, जहां बाढ़ के कारण प्रवेश द्वार तक पहुंचना भी बेहद कठिन हो गया है। नेपाली सेना अपने स्तर पर दो हेलीकॉप्टरों की मदद से खोज और बचाव कार्यों में जुटी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, स्थिति का आकलन करने के लिए सबसे पहले एक विशेषज्ञ दल मौके पर भेजा जाएगा ताकि यह तय किया जा सके कि किस प्रकार के उपकरणों की आवश्यकता है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र में राहत पहुंचाने के लिए एक पोर्टेबल बेली ब्रिज और मेडिकल सहायता भी भेजी जा रही है, जिससे इस गंभीर संकट की घड़ी में नेपाल को आवश्यक सहयोग मिल सके।


















