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लालढांग-चिल्लरखाल एलिवेटेड मार्ग की मांग को लेकर 255वें दिन भी धरना जारी

लालढांग-चिल्लरखाल एलिवेटेड मार्ग की मांग को लेकर 255वें दिन भी धरना जारी

उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र में लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर एलिवेटेड रोड के निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों और आंदोलनकारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार आगे बढ़ रहा है। इस मांग को लेकर चल रहा धरना प्रदर्शन रविवार को अपने 255वें दिन में पहुंच गया। इस महत्वपूर्ण और लंबे आंदोलन के दौरान क्षेत्र के कई लोग और आंदोलनकारी बड़ी संख्या में धरना स्थल पर पहुंचे और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। आंदोलनकारियों का मुख्य उद्देश्य इस पूरे क्षेत्र में एक पक्की और स्थायी मोटर मार्ग की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आम जनता को पिछले कई दशकों से चली आ रही आवागमन की गंभीर दिक्कतों से स्थायी रूप से पूरी तरह मुक्ति मिल सके और उनका जीवन सुगम हो सके।

लालढांग-चिल्लरखाल एलिवेटेड मार्ग की मांग को लेकर 255वें दिन भी धरना जारी

कामचलाऊ सड़क का विरोध और व्यावहारिक परेशानियां

प्रदर्शनकारियों ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि छब्बीस साल बीत जाने के बाद भी सरकार क्षेत्रीय जनता को केवल एक अस्थायी और कामचलाऊ सड़क देना चाहती है। उनका यह भी गंभीर आरोप है कि वर्तमान जनप्रतिनिधि अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस गंभीर समस्या को जानबूझकर बनाए रखना चाहते हैं। प्रस्तावित फॉरेस्ट रोड को लेकर लोगों ने कई बड़ी और व्यावहारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिनसे इस वैकल्पिक मार्ग की उपयोगिता पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस वैकल्पिक मार्ग पर रात के समय आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इसके अलावा, इस रास्ते से भविष्य में किसी भी प्रकार के मालवाहक वाहनों का संचालन संभव नहीं हो पाएगा। सबसे बड़ी चिंता यह है कि बरसात के मौसम में यह सड़क पहले की तरह ही पूरी तरह से बंद हो जाया करेगी, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और यात्रा संबंधी परेशानियां जस की तस बनी रहेंगी और उन्हें कोई वास्तविक राहत नहीं मिल पाएगी।

एलिवेटेड रोड ही एकमात्र स्थायी विकल्प

आंदोलन से जुड़े लोगों का स्पष्ट और अटल मानना है कि इन सभी समस्याओं का एकमात्र और स्थायी समाधान केवल एलिवेटेड रोड का निर्माण ही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट मांग की है कि वे राजनीतिक लाभ के मुद्दों को छोड़कर केवल एलिवेटेड मार्ग के निर्माण पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि कोई भी कामचलाऊ सड़क जनता की इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती है।

वन भूमि हस्तांतरण की मुख्य मांग

जनता और आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने एक ठोस मांग रखी है कि संबंधित वन भूमि को डिनोटिफाइड किया जाना चाहिए और उसे लोक निर्माण विभाग यानी PWD को आधिकारिक रूप से हस्तांतरित किया जाना चाहिए। ऐसा होने से ही एलिवेटेड मार्ग के निर्माण का वास्तविक रास्ता साफ हो सकेगा और क्षेत्र के लोगों को इस लंबे संघर्ष के बाद स्थायी राहत मिल पाएगी।

इस लंबे चले आ रहे और निरंतर जारी धरने में रविन्द्र सौंद, देवेंद्र रावत, शिवचरण सिंह, उम्मेद भंडारी, मधुसुदन नेगी, दिनेश सती, सुभाष त्यागी, गोवर्धन काला, पुष्पा मेहरा, कल्पना जोशी, राधा देवी और भूमा देवी सहित तमाम स्थानीय नागरिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और प्रशासन से अपनी जायज मांग पूरी करने की गुहार लगा रहे हैं।