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उत्तराखंड: जिम ट्रेनर दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आपराधिक मामले की कार्यवाही पर रोक

उत्तराखंड: जिम ट्रेनर दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आपराधिक मामले की कार्यवाही पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले जिम ट्रेनर दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक को एक मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह पूरा मामला इस साल जनवरी में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद से जुड़ा हुआ है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से लगातार कानूनी प्रक्रिया चल रही थी।

उत्तराखंड: जिम ट्रेनर दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आपराधिक मामले की कार्यवाही पर रोक

शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दीपक कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। इस मामले में दीपक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा। अदालत ने इस मामले में उत्तराखंड सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सर्वोच्च न्यायालय के इस कदम से याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है क्योंकि निचली अदालतों और उच्च न्यायालय से उन्हें राहत नहीं मिल पाई थी।

हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

दीपक कुमार ने अपनी याचिका के माध्यम से उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द करने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने उन्हें इस विषय पर सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या बोलने से भी रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में नोटिस जारी किया जाए। इस बीच, संबंधित एफआईआर से शुरू हुई सभी कार्यवाहियां स्थगित रहेंगी और हाई कोर्ट का आदेश भी स्थगित रहेगा।

क्या था पूरा विवाद?

यह पूरी घटना इसी साल 26 जनवरी की है, जब दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार से उसकी दुकान के नाम से बाबा शब्द हटाने की मांग की थी। कार्यकर्ताओं का तर्क था कि इस शब्द का कोटद्वार में सिद्धपीठ हनुमान मंदिर से संबंध है। जब इस बात का विरोध किया गया और दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि उनका नाम मोहम्मद दीपक है। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें दीपक कुमार पर उन्हें धमकाने और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया था।

पुलिस जांच और मुकदमे की धाराएं

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 115(2) यानी चोट पहुंचाना, 191(1) यानी दंगा करना, 351(2) यानी आपराधिक धमकी और धारा 352 यानी शांति भंग करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद दीपक ने इस मामले को रद्द कराने के लिए 31 जनवरी को उच्च न्यायालय का रुख किया था। मार्च 2026 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था और पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। अब शीर्ष अदालत के इस फैसले से उन्हें कानूनी मोर्चे पर राहत मिली है।