उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्या फार्मेसी से जुड़े एक ठगी के मामले में हरिद्वार की निचली अदालत को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने न्यायिक अनुशासन का पालन न करने पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए मामले में जल्द से जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। यह पूरा कानूनी विवाद एक बड़ी राशि को फ्रीज करने और उसके कानूनी निस्तारण से जुड़ा हुआ है, जिस पर लंबे समय से सुनवाई चल रही है।


जून 2022 का है पूरा मामला और एफआईआर
यह पूरा मामला जून 2022 का बताया जा रहा है। पतंजलि के प्रतिनिधि रमण पंवार की आधिकारिक शिकायत पर कनखल थाने में मुख्य आरोपी राकेश मेहरा और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले की पुलिस जांच के दौरान, जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी राकेश मेहरा और उनकी बेटियों के विभिन्न बैंक खातों में मौजूद कुल 31.21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को फ्रीज कर दिया था। इस वित्तीय कार्रवाई के बाद से ही यह मामला अदालतों में विचाराधीन है।

सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी टाला गया फैसला
फ्रीज की गई इस करोड़ों रुपये की राशि को मुक्त कराने के लिए संबंधित पक्ष की ओर से एक अर्जी दाखिल की गई थी। इस संबंध में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट को कानून के मुताबिक इस अर्जी का उचित निस्तारण करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। हालांकि, इसके बावजूद हरिद्वार की ट्रायल कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 को यह तर्क देते हुए अपना फैसला टाल दिया कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रशासनिक स्तर पर उनसे कुछ टिप्पणियां मांगी गई हैं।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और न्यायिक अनुशासन
ट्रायल कोर्ट के इस रवैये के खिलाफ जब मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, तो न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने इस पर बेहद गंभीर रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है और किसी भी प्रकार के प्रशासनिक पत्राचार का बहाना बनाकर उसके आदेश का पालन न करना न्यायिक अनुशासन का एक गंभीर उल्लंघन है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने आरोपी पक्ष की उन सभी दलीलों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के जज पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामला किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर करने की मांग उठाई थी।
दो सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला सुनाने के सख्त निर्देश
मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय को बहुत कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश में कहा है कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने के ठीक दो सप्ताह के भीतर, 15 जुलाई 2026 को पहले ही पूरी हो चुकी सुनवाई के आधार पर, सीआरपीसी की धारा 451 के तहत दाखिल किए गए सभी आवेदनों पर अपना अंतिम फैसला सुनाया जाए।















