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नैनीताल में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने की उठी मांग

नैनीताल में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने की उठी मांग

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में विभिन्न मांगों और मानदेय में वृद्धि को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का रोष लगातार गहराता जा रहा है। खराब मौसम और बारिश के बीच इन महिला कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और राज्य सरकार के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक और तीव्र बना देंगी। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दिन-रात अपनी सेवाएं देने वाली इन महिलाओं का यह गुस्सा लंबे समय से अनसुनी की जा रही उनकी समस्याओं का परिणाम है, जो अब खुलकर सामने आ रहा है। इस विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन और शासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, क्योंकि ये कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

नैनीताल में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने की उठी मांग

पुराने वादों को पूरा करने की मुख्य मांग

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने इस पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि साल 2021 में खटीमा में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसके तहत आशा कार्यकर्ताओं को ग्यारह हजार रुपये मानदेय प्रदान करने का आधिकारिक प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को जमीन पर लागू नहीं किया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष व्याप्त है। इसके अतिरिक्त, पिछले छह से सात महीनों से इन मेहनती कार्यकर्ताओं को न तो नियमित मानदेय मिला है और न ही कोई संशोधित बढ़ी हुई राशि उनके बैंक खातों में पहुंच पाई है। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ समय पर पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है, तो दूसरी तरफ उनके ऊपर लगातार कार्यभार और काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

राज्य कर्मचारी का दर्जा और भविष्य की चेतावनी

यूनियन की मुख्य और बुनियादी मांगों में आशा कार्यकर्ताओं को आधिकारिक रूप से राज्य कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है। इसके अलावा, सेवा समाप्त होने या सेवानिवृत्ति के पश्चात उनके जीवनयापन के लिए पेंशन की व्यवस्था की जाए या फिर एकमुश्त रिटायरमेंट फंड उपलब्ध कराया जाए। कमला कुंजवाल का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने में ये कार्यकर्ता रीढ़ की हड्डी की तरह अहम योगदान देती हैं, किंतु इसके बावजूद इनकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।

यूनियन ने सरकार को कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्याओं और मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कार्यकर्ता बड़े स्तर पर कार्य का बहिष्कार करेंगी और तीव्र आंदोलन का रास्ता चुनेंगी। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में बहिष्कार करने की चेतावनी भी दी गई है। इस प्रदर्शन के दौरान चंद्रा सती, लीला पांडे, चंपा बिष्ट, सरिता, गंगा, प्रेमा, हेमा रावत और प्रभा बिष्ट सहित कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ता भी उपस्थित रहीं और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।