उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक मामला काफी चर्चा में आया था, जिसमें एक प्राथमिक स्कूल के सहायक शिक्षक को राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर जब सवाल उठने लगे और विरोध शुरू हुआ, तो शिक्षा विभाग को अपने ही कदम पर पुनर्विचार करते हुए इस आदेश को अंततः रद्द करना पड़ा। यह पूरी घटना विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और उससे उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है।


मुनस्यारी विकासखंड के जीआईसी बांसबगड़ की स्थिति
प्राप्त विवरण के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) बांसबगड़ से हाल ही में चार शिक्षकों का अन्यत्र स्थानांतरण हो गया था। इस वजह से स्कूल में अध्यापकों की संख्या कम हो गई थी। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब एलटी स्तर पर गणित का पढ़ाने वाला कोई भी शिक्षक इस विद्यालय में उपलब्ध नहीं रहा। गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ रहा था और उनका पाठ्यक्रम प्रभावित हो रहा था।

इस शैक्षणिक समस्या के कारण स्थानीय अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावकों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती है, तो वे इसके खिलाफ कड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।

खंड शिक्षा अधिकारी का निर्देश और बढ़ता विवाद
अभिभावकों के गुस्से और आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए मुनस्यारी के खंड शिक्षा अधिकारी ने एक वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया। इस अधिकारी ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय रूमीडोला में तैनात सहायक शिक्षक कमलेश जोशी को जीआईसी बांसबगड़ में स्थानांतरित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इंटर कॉलेज के छात्रों की गणित की पढ़ाई बाधित न हो।
लेकिन एक प्राथमिक स्तर के शिक्षक को सीधे उच्च कक्षाओं यानी इंटर कॉलेज स्तर पर तैनात करने के इस अजीबोगरीब निर्णय पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इस आदेश के सामने आते ही अभिभावकों के साथ-साथ कई अन्य संगठनों ने भी इस पर तीखी आपत्ति जताई और अपनी नाराजगी जाहिर की।
शिक्षा विभाग का तर्क और आदेश की वापसी
मामले में तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उनका कहना था कि जिस प्राथमिक शिक्षक को जीआईसी बांसबगड़ में भेजा गया था, वे गणित विषय से पोस्ट ग्रेजुएट यानी स्नातकोत्तर हैं। चूंकि उस शिक्षक के पास गणित विषय का अच्छा ज्ञान और अकादमिक पृष्ठभूमि थी, इसलिए शिक्षण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह निर्णय लिया गया था।
विवाद और विरोध के इस माहौल के बीच पिथौरागढ़ के मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया। अधिकारियों द्वारा स्थिति की समीक्षा किए जाने के बाद, अंततः उस प्राथमिक शिक्षक की इंटर कॉलेज में की गई विवादास्पद तैनाती के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।















