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देहरादून में भाजपा मंडल अध्यक्षों के इस्तीफे से मची हलचल, सामने आए अलग-अलग कारण

देहरादून में भाजपा मंडल अध्यक्षों के इस्तीफे से मची हलचल, सामने आए अलग-अलग कारण

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल और दो मंडल अध्यक्षों के हटने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं गर्म हो गई हैं। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दो मंडलों के अध्यक्षों के मामलों ने तूल पकड़ लिया है, जिससे पार्टी के भीतर अंदरूनी स्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की बातें सामने आ रही हैं। इस घटनाक्रम के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर काफी तेज हो गया है और स्थानीय स्तर पर इस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

देहरादून में भाजपा मंडल अध्यक्षों के इस्तीफे से मची हलचल, सामने आए अलग-अलग कारण

श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंडल अध्यक्ष का बड़ा दावा

धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंडल के अध्यक्ष वासुदेव जखमोला ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने पद से किसी भी प्रकार का कोई लिखित इस्तीफा नहीं दिया है। उनके अनुसार, उन्होंने केवल एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था जिसमें उन्होंने नए मंडल प्रभारी के साथ काम करने में अपनी असहजता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि पूर्व में उस प्रभारी के साथ उनके अनुभव ठीक नहीं रहे थे, इसलिए या तो प्रभारी को बदला जाए या उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। जखमोला का यह भी आरोप है कि संगठन ने उनके इस संदेश को ही उनका इस्तीफा मान लिया और उनकी मर्जी या किसी औपचारिक पत्र के बिना ही कमल राठौर को नया मंडल अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि संगठन ने यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि वे संबंधित प्रभारी के साथ काम क्यों नहीं करना चाहते थे और उनके बारे में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

दीनदयाल उपाध्याय मंडल के अध्यक्ष का त्यागपत्र

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दीनदयाल उपाध्याय मंडल के अध्यक्ष आशीष गिरी ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। गिरी ने अपने इस कदम के पीछे पूरी तरह से निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है। उनके अनुसार, वे अपने पारिवारिक दायित्वों और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों के बीच सही तालमेल या संतुलन नहीं बैठा पा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने अपने पद से हटने का निर्णय लिया। हालांकि, इससे पहले इस मंडल में पदाधिकारियों के बीच आपसी तालमेल और कामकाज को लेकर कुछ मतभेद की बातें भी सामने आई थीं, लेकिन गिरी का स्पष्ट कहना है कि उनके इस इस्तीफे का उन आपसी विवादों या अनबन से कोई भी संबंध नहीं है।

संगठन और नेतृत्व का पक्ष

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंडल के अध्यक्ष ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर काम करने में अपनी असमर्थता जताई थी, जिसके बाद उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए नया मनोनयन कर दिया गया है। वहीं, दूसरे मंडल अध्यक्ष आशीष गिरी ने भी अपने निजी कारणों से पद छोड़ने की बात कही थी, जिसे संगठन द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। महानगर अध्यक्ष का यह भी कहना है कि विधायक और मंडल अध्यक्ष के बीच क्या चल रहा है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। इस प्रकार दोनों ही मामलों में संगठन ने अपने स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने की बात कही है।