चंपावत जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण कालीगूंठ-पूर्णागिरि क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री घोषणा के तहत इस क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के लिए 66.74 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के धरातल पर उतरने से यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी। इस पूरे इलाके में पर्यटकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है ताकि आने वाले दिनों में हरसंभव सहायता पहुंचाई जा सके।


धार्मिक और प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र
कालीगूंठ और पूर्णागिरि का यह इलाका लंबे समय से देश भर के श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद खास महत्व रखता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में सैलानी और भक्त पहुंचते हैं। हालांकि, सुविधाओं की कमी के कारण यहां बुनियादी व्यवस्थाओं को और बेहतर करने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह नया विकास प्रस्ताव तैयार किया गया है जिससे इस क्षेत्र की ख्याति दूर-दूर तक फैल सके और अधिक लोग यहां आ सकें।

मुख्यमंत्री घोषणा के तहत तैयार हुआ प्रस्ताव
यह पूरा प्रस्ताव मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 258/2026 के अंतर्गत बनाया गया है। इस योजना के तहत कुल 66.74 लाख रुपये की लागत का अनुमानित खाका खींचा गया है। प्रशासनिक स्वीकृति के लिए इस प्रस्ताव को उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है। जैसे ही इसे अंतिम मंजूरी मिलेगी, ज़मीन पर विकास कार्यों को शुरू कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी मनीष कुमार के अनुसार, इन सभी कार्यों का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना और स्थानीय निवासियों को पर्यटन गतिविधियों से आर्थिक लाभ पहुंचाना है ताकि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
क्षेत्र में पर्यटन के विकास का सीधा सकारात्मक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। जब किसी जगह पर पर्यटकों की संख्या बढ़ती है, तो उससे होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय दुकानें और उत्पादों से जुड़े व्यवसायों को मजबूती मिलती है। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर पैदा होने की भी पूरी संभावना है, जिससे यहां के निवासियों का जीवन स्तर भी बेहतर हो सकेगा और वे आत्मनिर्भर बन पाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा खास जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सौंदर्यीकरण के कार्यों से ही पर्यटन को लंबे समय तक बढ़ावा नहीं मिल सकता। इसके लिए सड़क, पार्किंग, साफ-सफाई, पीने का पानी, शौचालय और सुरक्षित आने-जाने जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना भी उतना ही जरूरी है। यदि प्रस्तावित योजना में इन सभी जरूरतों को शामिल करते हुए काम पूरे किए जाते हैं, तो यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के साथ एक अच्छी तरह से विकसित और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है।















