देहरादून। बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण लेकर गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरुप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति ने आज भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री के बयान दर्ज किये। खत्री ने जांच समिति के समक्ष प्रकरण से संबंधित अपना पक्ष लिखित रूप में रखा और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने का अनुरोध किया है।


चढ़ावा चोरी प्रकरण को उठाने वाले संदीप खत्री को जांच समिति ने आज यहां कमिश्नर कार्यालय में अपना बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था। अपने लिखित बयान में खत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर उनके द्वारा 02 जुलाई 2026 को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की गई थी।

जांच समिति के समक्ष अपने बयान में संदीप खत्री ने चढ़ावा गिनती से जुड़े कर्मचारियों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने विशेष रूप से यह पता लगाने की मांग की कि वैयक्तिक सहायक पदनाम वाले कर्मचारी को उसके मूल कार्य से हटाकर प्रोटोकॉल और चढ़ावा गिनती जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किस आधार पर और किस स्तर के आदेश से तैनात किया गया था।
भैरव सेना अध्यक्ष ने मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आई उन खबरों का भी हवाला दिया, जिनमें बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा गिनती से संबंधित पुरानी CCTV फुटेज के उपलब्ध नहीं होने या गायब होने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यदि यह तथ्य सही हैं, तो चढ़ावा चोरी के पीछे व्यापक व सुनियोजित घटनाक्रम हो सकता है। 
प्रकरण में चमोली पुलिस की ओर से गठित SIT द्वारा अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी किए जाने का भी खत्री ने अपने बयान में उल्लेख किया है। उन्होंने जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रखने और मामले से जुड़े सभी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह आम चर्चा है कि उच्चस्तर के संरक्षण बिना छोटे कर्मचारियों द्वारा घटना को अंजाम दिया जाना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस तरह के प्रकरण से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होती हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों को सामने लाना जरूरी है।
खत्री ने जांच समिति से मामले में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में बदरीनाथ धाम अथवा अन्य धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
















