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नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने से दो की मौत, प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने से दो की मौत, प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले ज्योलीकोट क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर लापरवाही के कारण एक बड़ा स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है। यहां पेयजल लाइनों में सीवर का पानी मिलने की वजह से हजारों लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया। इस मानवीय और प्रशासनिक चूक के परिणामस्वरुप क्षेत्र में दो लोगों की असमय मौत हो गई है, जबकि सौ से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा विभिन्न एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि बढ़ते संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने से दो की मौत, प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

पेयजल स्रोत में सीवेज मिलने की बड़ी लापरवाही

स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ठीक ऊपरी हिस्से में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया गया है। इसी अव्यवस्था के चलते लंबे समय से सीवर का दूषित पानी पेयजल की मुख्य लाइनों में रिसता रहा। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने पानी से उठने वाली बदबू, झाग और उल्टी-दस्त जैसी समस्याओं की शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन लंबे समय तक इन शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता रहा। जब ग्रामीणों ने इस मामले में कड़ा विरोध जताया और अनशन पर बैठे, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद की गई जांच में यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई कि पेयजल स्रोत में सीवेज मिल रहा था। जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया कि मामला सामने आते ही उस दूषित पेयजल स्रोत को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। वर्तमान में सीवर लाइनों और पानी की लाइनों को एक-दूसरे से अलग करने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, और गांवों में वैकल्पिक व स्वच्छ पानी के स्रोतों से जलापूर्ति शुरू की गई है।

अस्पतालों में भर्ती मरीज और स्वास्थ्य पर गंभीर असर

इस जहरीले पानी के सेवन से पांच अलग-अलग गांवों के करीब दो सौ लोग पीलिया, तेज बुखार और गंभीर उल्टी-दस्त से पीड़ित हो चुके हैं। प्रभावित मरीजों की मेडिकल जांच रिपोर्ट में उनके लीवर के एंजाइम सामान्य स्तर से कई गुना अधिक पाए गए हैं, जो इस पानी की विषाक्तता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इस स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान इलाज के दौरान दो बहुमूल्य जानें चली गईं। छीड़ा गांव के रहने वाले एक युवा और गाजा गांव के एक किशोर की दिल्ली और बरेली के बड़े अस्पतालों में उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा, पचास से साठ से अधिक गंभीर मरीज नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल के साथ-साथ हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अकेले नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में ही पच्चीस से अधिक पीलिया के मरीज भर्ती होकर उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने से दो की मौत, प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम

इस पूरी घटना के तूल पकड़ने और स्थिति के बेकाबू होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। जिलाधिकारी द्वारा क्षेत्र के सभी विद्यालयों में सात दिनों का अवकाश घोषित कर दिया गया है ताकि बच्चों को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रखा जा सके। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर हेल्थ कैंप लगाने और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा व क्लोरीनेशन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि इस संकट का दायरा और अधिक न फैले।