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बदरीनाथ धाम के तप्त कुंड में अधिक स्नान से स्वास्थ्य को खतरा, चिकित्सकों ने दी चेतावनी

बदरीनाथ धाम के तप्त कुंड में अधिक स्नान से स्वास्थ्य को खतरा, चिकित्सकों ने दी चेतावनी

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तप्त कुंड में स्नान को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है। कुंड के प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त पानी में लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो श्रद्धालुओं के जीवन के लिए घातक साबित हो सकती हैं। तीर्थयात्रा पर आने वाले लोगों को इस बात की जानकारी होना बहुत आवश्यक है कि अत्यधिक स्नान उनके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

बदरीनाथ धाम के तप्त कुंड में अधिक स्नान से स्वास्थ्य को खतरा, चिकित्सकों ने दी चेतावनी

तप्त कुंड के पानी और स्वास्थ्य जोखिम

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस कुंड से प्राकृतिक रूप से निकलने वाले पानी में सल्फर की मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा, तप्त कुंड क्षेत्र में लगातार उठने वाली गर्म हवाओं के कारण वहां पर ऑक्सीजन का दबाव भी काफी कम रहता है। इस तरह की भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति में कुंड के अंदर अधिक देर तक बैठने या स्नान करने से लोगों को अचानक चक्कर आने, मूर्छा आने यानी बेहोशी छाने और हृदय से जुड़ी परेशानियां होने का गंभीर खतरा लगातार बना रहता है। यही मुख्य कारण है कि स्थानीय निवासी भी इस स्थिति से भली-भांति परिचित होते हैं और वे कुंड के पानी में बहुत अधिक देर तक नहीं रुकते हैं, बल्कि अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं।

हालिया दुखद घटना और चिकित्सा सलाह

हाल ही में तप्त कुंड के पास हुई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना के बाद प्रशासन और चिकित्सा विभाग की यह चेतावनी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हाल ही में शुक्रवार के दिन तप्त कुंड में एक दिन में 108 बार डुबकी लगाने की प्रक्रिया के दौरान दो सगी बहनों की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इन दोनों मृत महिलाओं की पहचान 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी के रूप में हुई थी। ये दोनों महिलाएं पिछले लगभग एक सप्ताह से लगातार प्रतिदिन 108 डुबकी लगाने के धार्मिक अनुष्ठान या नियम का पालन कर रही थीं। चिकित्सा आकलन के अनुसार, अत्यधिक शारीरिक श्रम और पानी के प्रभाव के चलते हृदय गति रुकने यानी कार्डियक अरेस्ट के कारण उन दोनों की मृत्यु हो गई थी।

इस दुर्घटना के तुरंत बाद बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ. सचिन राणा ने इस संबंध में बेहद स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने देश भर से बदरीनाथ धाम आने वाले सभी श्रद्धालुओं से यह विशेष अपील की है कि वे अपनी सेहत, उम्र और शारीरिक क्षमता का पूरा ध्यान रखें। डॉक्टर राणा के अनुसार, श्रद्धालुओं को तप्त कुंड में केवल दो से तीन बार ही डुबकी लगानी चाहिए और इसके तुरंत बाद कुंड से सुरक्षित बाहर आ जाना चाहिए। ऐसा करने से किसी भी प्रकार की शारीरिक असहजता, चक्कर आने की समस्या या अन्य बड़े स्वास्थ्य खतरों से आसानी से बचा जा सकता है।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सावधानियां

  • तप्त कुंड में स्नान करते समय हमेशा समय सीमा का पूरा ध्यान रखें।
  • अत्यधिक संख्या में डुबकी लगाने से बचें और केवल दो से तीन बार ही स्नान पूरा करें।
  • चक्कर आने, कमजोरी या किसी भी प्रकार की शारीरिक बेचैनी महसूस होने पर तुरंत बाहर आएं।
  • बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।