- अंकिता भंडारी की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तराखंड में एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की यादें ताजा हो गईं, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने एक वीडियो संदेश जारी कर अंकिता को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अन्याय के आगे झुकने से इनकार कर उत्तराखंड के स्वाभिमान की रक्षा की और इसके लिए उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।
स्वाभिमान के लिए जान गंवाने वाली बेटी
हरीश रावत ने अपने संदेश में इस दिन को उत्तराखंड के लिए बेहद पीड़ादायक बताया। उन्होंने अंकिता को एक स्वाभिमानी बेटी करार देते हुए कहा कि उसे कथित तौर पर किसी वीआईपी को खुश करने के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया गया था। अंकिता ने इस दबाव के सामने घुटने टेकने से साफ मना कर दिया और इसी दृढ़ता के कारण उसे अपनी जान चुकानी पड़ी।

घटना और न्याय की कानूनी प्रक्रिया
पौड़ी गढ़वाल के गंगा भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता सितंबर 2022 में लापता हो गई थी, जिसके बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दो अन्य साथियों को मई 2025 में अदालत द्वारा दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, घटना से जुड़े कथित वीआईपी एंगल को लेकर राजनीतिक हलकों और जनता के बीच सवाल अब भी बने हुए हैं।

सीबीआई जांच और राजनीतिक मांगें
अंकिता हत्याकांड के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा वीआईपी चेहरे को बेनकाब करने की मांग उठाई जाती रही है। उत्तराखंड सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश जनवरी 2026 में की थी। चौथी पुण्यतिथि के मौके पर विभिन्न मंचों से यह मांग फिर दोहराई गई है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं और तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी के साथ ऐसा अत्याचार न हो सके।

















