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उत्तराखंड में आरटीआई से हुआ खुलासा, विधायक निधि खर्च करने में पीछे रहे पहाड़ी विधायक

उत्तराखंड में आरटीआई से हुआ खुलासा, विधायक निधि खर्च करने में पीछे रहे पहाड़ी विधायक

उत्तराखंड में एक आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से विधानसभा क्षेत्रों में विधायक निधि के इस्तेमाल की स्थिति सामने आई है। जून 2026 तक के इन आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 1,664 करोड़ रुपये की विधायक निधि में से लगभग 1,091 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। यह रिपोर्ट भौगोलिक और राजनीतिक आधार पर विधायक निधि के उपयोग में बड़े अंतर को दर्शाती है।

उत्तराखंड में आरटीआई से हुआ खुलासा, विधायक निधि खर्च करने में पीछे रहे पहाड़ी विधायक

पहाड़ और मैदान के खर्च में अंतर

आरंभिक वित्तीय वर्षों से लेकर जून 2026 तक के सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, मैदानी जिलों के विधायकों ने पहाड़ी जिलों के मुकाबले अधिक तेजी से निधि का उपयोग किया है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों के विधायकों का औसत खर्च करीब 16.88 करोड़ रुपये प्रति विधायक रहा, जबकि पहाड़ी जिलों के विधायकों का औसत खर्च लगभग 14.74 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं, देहरादून और नैनीताल जैसे मिश्रित जिलों में औसत खर्च 15.77 करोड़ रुपये प्रति विधायक रहा। प्रतिशत के लिहाज से मैदानी जिलों की खर्च दर करीब 71.1 प्रतिशत और पहाड़ी जिलों की करीब 62 प्रतिशत है।

राजनीतिक दलों और प्रमुख चेहरों का प्रदर्शन

राजनीतिक संबद्धता के आधार पर देखें तो विधायकवार खर्च प्रतिशत के साधारण औसत में कांग्रेस विधायक लगभग 68.4 प्रतिशत और भाजपा विधायक लगभग 64.4 प्रतिशत पर हैं। व्यक्तिगत स्तर पर रुड़की से भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा और पिरान कलियर से कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद 77 प्रतिशत खर्च के साथ सबसे आगे हैं। दूसरी ओर, कुछ विधायकों और मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में खर्च का स्तर 60 प्रतिशत से भी नीचे दर्ज किया गया है, जिसमें टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय का क्षेत्र भी शामिल है।

उत्तराखंड में आरटीआई से हुआ खुलासा, विधायक निधि खर्च करने में पीछे रहे पहाड़ी विधायक

विशेषज्ञों की राय और चिंताएं

वरिष्ठ पत्रकारों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि विधायक निधि को प्रभावी ढंग से शत-प्रतिशत खर्च करना सभी जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है। सीमित संसाधनों वाले राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए इन निधियों का सही उपयोग बेहद आवश्यक माना गया है।