उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में हिमालय की भव्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का शनिवार को शुभारंभ हुआ। भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन द्वारा ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य की लोक संस्कृति, पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देना है।


लोक संस्कृति और परंपराओं की अद्भुत झलक
महोत्सव के दौरान गढ़वाली लोकगीत, लोकनृत्य, पांडव नृत्य, छोलिया नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से हिमालयी जीवनशैली और देवभूमि की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस आयोजन में श्रद्धालुओं, पर्यटकों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

स्थानीय उत्पादों और आजीविका को बढ़ावा
कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं, जहां हस्तशिल्प, हथकरघा, ऊनी वस्त्र, जैविक उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, स्थानीय मसाले, जड़ी-बूटियां और पहाड़ी पकवान बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारोबारियों द्वारा बनाए गए इन उत्पादों से स्वरोजगार और आर्थिक मजबूती के नए अवसर मिल रहे हैं।

भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी और युवाओं की भागीदारी
इस आयोजन का एक अन्य मुख्य आकर्षण भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी रही। यहां युवाओं और विद्यार्थियों ने सेना के आधुनिक उपकरणों, सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के जीवन और आपदा राहत कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिससे उन्हें अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का अवसर मिला।
पर्यटन और सीमांत क्षेत्रों का विकास
यह महोत्सव धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और सीमा पर्यटन को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम की भावना के तहत आयोजित इस उत्सव से स्थानीय होटल, होमस्टे, परिवहन और भोजनालयों जैसे व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है। यह आयोजन उत्तराखंड की संस्कृति को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।















