उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की एक वरिष्ठ नेता और पार्टी कार्यकर्ता अपनी ही सरकार के मंत्रियों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते हुए नजर आए। देहरादून में समाज कल्याण विभाग के 12 करोड़ रुपये के टेंडर मामले को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ विपक्ष से जुड़े लोगों को दिया जा रहा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सांकेतिक धरना दिया और विवादित सूची को तुरंत निरस्त कर उसकी समीक्षा करने की मांग की।


वर्षों का आक्रोश और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप
धरने का नेतृत्व कर रही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने कहा कि सरकार के खिलाफ आज उन्हें जो कदम उठाना पड़ा है, वह किसी एक दिन का गुस्सा नहीं बल्कि वर्षों का आक्रोश है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में अपनी सरकार है, तब भी यदि विकास योजनाओं का लाभ विपक्षी दल के लोगों को मिलेगा, तो पार्टी कार्यकर्ता अपनी व्यथा किसके सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करते हैं और अपनी जेब से पैसे खर्च करके पार्टी के कामों में जुटते हैं, लेकिन जब योजनाओं के आवंटन की बारी आती है तो निराशा ही हाथ लगती है।

टेंडर सूची रद्द करने और समीक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि वर्तमान टेंडर सूची को पूरी तरह से रद्द किया जाए और इसकी नए सिरे से समीक्षा की जाए। मधु चौहान ने बताया कि इस संबंध में पहले भी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की गई थी, लेकिन वहां से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कैबिनेट मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मंत्री जी ने इस मामले में तीन-चार लोगों को बातचीत के लिए बुलाया और सचिव के साथ समीक्षा करने की बात कही है, लेकिन वे कार्यकर्ताओं के बीच आकर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं।


सांकेतिक प्रदर्शन और आगे की चेतावनी
नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक सांकेतिक धरना है जिसके माध्यम से उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और सूची को रद्द नहीं किया गया, तो वे अपने प्रण को पूरा करने के लिए आगे भी कदम उठाएंगे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों और अभियानों में हमेशा आगे रखा जाता है, लेकिन हक मिलने के समय उनकी अनदेखी की जा रही है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
















