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भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास में स्वदेशी नस्ल के डॉग्स ने दिखाई ताकत

भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास में स्वदेशी नस्ल के डॉग्स ने दिखाई ताकत

भारत और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ में भारतीय सेना के प्रशिक्षित डॉग्स अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। राइस, विक्टर, जैक और राउडी नामक इन डॉग्स ने सैनिकों के साथ मिलकर रूम इंटरवेंशन और रैपलिंग जैसी ड्रिल्स में हिस्सा लिया है। इन अभ्यासों के माध्यम से डॉग्स ने कठिन सामरिक परिस्थितियों में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की अपनी मजबूत क्षमता का परिचय दिया है।

भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास में स्वदेशी नस्ल के डॉग्स ने दिखाई ताकत

युद्ध अभ्यास-2026 का विवरण

यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 15 सितंबर से 28 सितंबर तक औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं। इस दौरान पर्वतीय युद्ध कौशल, आतंकवाद रोधी अभियानों, ड्रोन तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों पर संयुक्त रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों को भारतीय सेना के डॉग्स और उनके हैंडलर्स के बीच बेहतरीन तालमेल, अनुशासन और फुर्ती को करीब से देखने का अवसर मिला।

स्वदेशी रामपुर हाउंड पर बढ़ रहा भरोसा

इस अभ्यास में शामिल राउडी और विक्टर रामपुर हाउंड नस्ल के डॉग्स हैं, जो कि एक पूरी तरह से भारतीय स्वदेशी नस्ल है। भारतीय सेना अब इन स्वदेशी नस्लों को सैन्य भूमिकाओं में तेजी से शामिल कर रही है। अपनी तेज फुर्ती, उच्च सहनशक्ति और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से ढल जाने की क्षमता के कारण रामपुर हाउंड को सैन्य कार्यों के लिए बेहद उपयोगी माना गया है। इसके अलावा, जैक बेल्जियन मैलिनोइस और राइस लैब्राडोर रिट्रीवर नस्ल का डॉग है। इन सभी डॉग्स को उनकी विशेष योग्यताओं के आधार पर ट्रैकिंग, विस्फोटक पदार्थों की पहचान, सुरक्षा और इंटरवेंशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

सीमावर्ती इलाकों में मिला ऑपरेशनल अनुभव

इन सैन्य डॉग्स का अनुभव केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें देश की उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर भी तैनात किया जा चुका है। रामपुर हाउंड्स ने इससे पहले मेघालय के उमरोई में हुए बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भी हिस्सा लिया था। इसके बाद इन्हें मणिपुर सीमा पर तैनात किया गया था, जहां इन्होंने सफलतापूर्वक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी आईईडी का पता लगाया था। इसके अतिरिक्त, इसी कैनाइन लाइन के अन्य डॉग्स को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जालंधर और अमृतसर सेक्टर में भी तैनात किया गया था, जिससे इनकी उच्च उपयोगिता और भरोसेमंद प्रदर्शन का प्रमाण मिलता है।