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आज उत्तराखंड क्रांति दल की हरिद्वार संगठनात्मक जिला इकाई ने रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर (उ०प्र०) जाकर उत्तराखण्ड राज्यान्दोलन में शहीदों अश्रुपूरित पुष्पांजलि हार्दिक श्रद्धांजलि दी

 

2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली जाते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उत्तराखंड राज्यान्दोलनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के नाम पर आंदोलनकारी पुरुषों और महिलाओं के साथ जघन्य कांड किया।

इस कांड में आंदोलकारियों की हत्या औऱ महिलाओं की अस्मिता को लूटा गया।

जिस स्थान पर उक्रांद द्वारा 02 अक्टूबर 1995 को शहीदों की शहादत की बरसी पर शहीद स्मारक का निर्माण करके उत्तराखंड का प्रथम तीर्थ बना दिया था, ऐसे शहीद स्थल पर उक्रांद हरिद्वार संगठनात्मक जिले की ओर से पुष्पांजलि औऱ श्रद्धांजलि अर्पित करी औऱ शपथ ली कि शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाएंगे, औऱ नारे लगाये कि “शहीदों हम शर्मिंदा हैं तुम्हारे कातिल ज़िंदा हैं” “शहीदों हमारे दिलों में अमर रहें”।

शहीद स्मारक में उत्तराखंड मुख्यमंत्री के नाम पर प्रवेश करने से उ०प्र० पुलिस के रोकने पर चौधरी बृजवीर सिंह औऱ रवीन्द्र वशिष्ठ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए जिससे हरिद्वार जिलाधिकारी द्वारा प्रवेश करवाया गया औऱ रवींद्र वशिष्ठ ने जिलाधिकारी दीक्षित जी से आग्रह किया कि हरिद्वार में अर्धकुंभ बजट के तहत निर्मित किसी घाट का नामकरण उत्तराखंड राज्यान्दोलन शहीद घाट किया जाए जिसे उन्होंने स्वीकार किया।

पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में वरिष्ठ आंदोलनकारी एवं शहीद स्मारक के निर्माताओं में शामिल रवींद्र वशिष्ठ, उक्रांद केंद्रीय सलाहकार श्रीमती सरिता पुरोहित, उक्रांद के० विशेष आमंत्रित सदस्य चौधरी बृजवीर सिंह, उक्रांद वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह होल्कर (देहरादून), किसान प्रकोष्ठ के० उपाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, रानीपुर विधानसभा अध्यक्ष विशाल धीमान, सुरेन्द्र सिंह रावत, मनी राम, विशाल शर्मा, अनुज चौधरी, महेंद्र सिंह बिष्ट, रोशन रमोला व अन्य कार्यकर्ता थे।