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दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का 723वां उर्स संपन्न, कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का 723वां उर्स संपन्न, कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

सुप्रीम कोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू और वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद कपिल सिब्बल ने प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के 723वें उर्स के मौके पर दिल्ली स्थित उनकी दरगाह का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने दरगाह पहुंचकर देश में प्रेम, करुणा और सांप्रदायिक सद्भाव के सूफी मूल्यों को याद किया।

दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का 723वां उर्स संपन्न, कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

दरगाह पर हुआ स्वागत और पारंपरिक रस्में

दिल्ली की इस ऐतिहासिक दरगाह पर पहुंचने पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सज्जादा नशीन सैयद फरीद अहमद निज़ामी ने इन गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। आगंतुकों को संत के जीवन से जुड़ी कई अहम बातें और प्रेरणादायक कहानियां भी सुनाई गईं। इसके बाद परंपरा के अनुसार हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया और उनके प्रमुख शिष्य अमीर खुसरो की मजारों पर फूल अर्पित किए गए और चादर चढ़ाई गई।

सूफी परंपराएं और सामाजिक सद्भाव

दरगाहों और सूफी परंपराओं का भारतीय समाज में एक विशेष स्थान रहा है, जो विभिन्न समुदायों के लोगों को आपस में जोड़ती हैं। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया (1238-1325) ने हमेशा इंसानों के बीच आपसी प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जरूरतमंद की मदद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी आगंतुक का धर्म पूछने से पहले उसे भोजन व जल प्रदान किया जाए।

अमीर खुसरो का सांस्कृतिक योगदान

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के मुख्य शिष्य अमीर खुसरो मध्यकालीन भारत के एक महान कवि, संगीतकार और सांस्कृतिक हस्ती रहे हैं। भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति के विकास में उनके अमूल्य योगदान के कारण उन्हें अक्सर विशेष सम्मान के साथ याद किया जाता है। उर्स के इस पावन अवसर पर कव्वाली और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए सूफी संतों की शिक्षाओं को जीवंत रखा जाता है।