उत्तराखंड में सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर और गहरे सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य पुलिस की ऑनलाइन एफआईआर सेवा पिछले करीब पंद्रह दिनों से पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। इसके साथ ही, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के डेटा में भी सेंध लगने की बात सामने आई है। इन दोनों महत्वपूर्ण घटनाओं ने मिलकर सरकारी तंत्र की तकनीकी और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंताएं बढ़ा दी हैं।


पुलिस की ऑनलाइन एफआईआर सेवा और सीसीटीएनएस का हाल
उत्तराखंड पुलिस अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने और पहले से दर्ज एफआईआर देखने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इस व्यवस्था को सीसीटीएनएस उत्तराखंड के नाम से भी जाना जाता है। पिछले लगभग पंद्रह दिनों से यह महत्वपूर्ण सेवा ठप चल रही है। जब लोग गूगल के माध्यम से सीसीटीएनएस उत्तराखंड के लिंक पर जाते हैं, तो मुख्य नागरिक पोर्टल तो खुल जाता है, लेकिन वहां वे अपनी दर्ज की गई एफआईआर को देखने में असमर्थ रहते हैं।

पड़ताल करने पर सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि यह पूरा मामला साइबर हमले का परिणाम है। इस हमले की वजह से सर्वर को नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण ये ऑनलाइन सेवाएं बंद हैं। इसके विकल्प के तौर पर एक अन्य लिंक भी चलाया गया है, लेकिन उस पर भी यह स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण एफआईआर देखने की सेवाएं बंद हैं। अधिकारियों के अनुसार, पुराने लिंक का दुरुपयोग किया जा रहा था जहाँ ठग सीधे एफआईआर की कॉपी निकालकर अपराधों को अंजाम दे रहे थे, इसलिए उसे प्रतिबंधित किया गया है ताकि पीड़ित पक्ष लॉगिन करके अपनी एफआईआर देख सकें। गौरतलब है कि 2023 में भी सीसीटीएनएस पर साइबर हमला हो चुका है। हालांकि, आईटीडीए के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का डेटा और सुरक्षा का खतरा
पुलिस विभाग के अलावा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड की सुविधा देने वाले राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास लाखों कर्मचारियों और आम जनता का डेटा मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक, इक्कीस अगस्त की रात साढ़े दस बजे किसी ने प्राधिकरण के क्रेडेंशियल यानी आईडी और पासवर्ड का डेटा कॉपी कर लिया।
इस बात का अलर्ट भी आ चुका है। आईटीडीए ने इस संबंध में प्राधिकरण के अधिकारियों से जवाब मांगा है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जिस समय डेटा कॉपी की बात कही जा रही है, उस समय कार्यालय बंद रहता है। फिर भी इसकी जांच की जा रही है कि कोई उस दौरान अंदर तो नहीं गया था। आशंका है कि साइबर अपराधियों ने डेटा कॉपी किया है। प्राधिकरण के अपर निदेशक आईटी ने बताया कि आईटीडीए ने इस बारे में जानकारी मांगी है और कार्यालय बंद होने के बावजूद इसकी जांच की जा रही है।


















