उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें चाय की दुकानों पर जातिगत भेदभाव की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के बयानों से संकीर्ण राजनीति की पराकाष्ठा झलकती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि चाय की दुकानों पर चाय परोसने के दौरान भेदभाव किया जाता है, जिसके तहत दलितों को डिस्पोजेबल कप में और अन्य लोगों को कांच या सिरेमिक के दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप में चाय दी जाती है। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक लंबी बहस छिड़ गई थी।


अपने खटीमा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय लोगों के साथ एक दुकान पर डिस्पोजेबल कप में चाय पी और इस दौरान का एक वीडियो भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किया। वीडियो और अपनी पोस्ट के माध्यम से उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चाय का स्वाद और लोगों का अपनापन तो साफ नजर आया, लेकिन वहां किसी भी प्रकार की जाति नहीं दिखाई दी।

संकीर्ण राजनीति करार दिया
मुख्यमंत्री धामी ने राहुल गांधी के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें चाय के कप को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया गया था। उन्होंने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन किसी की सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए। राहुल गांधी के इस तरह के बयानों को मुख्यमंत्री ने राजनीति से प्रेरित और समाज में दूरियां बढ़ाने वाला बताया है।

राहुल गांधी के इस दावे के बाद देश भर के विभिन्न राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कई नेताओं और लोगों ने इस पर अपने विचार रखे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री धामी ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताते हुए इस पर तीखा प्रहार किया है।
मौलवी के बयान और कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल
अपने दौरों और अन्य कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रपुर में बारावफात जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक के पास भड़काऊ भाषण देने वाले आरोपी मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद के मामले पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि देवभूमि में खुलेआम धमकी दी गई, लेकिन विपक्षी दल के नेताओं की जुबान बंद रही। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि क्या कांग्रेस नेताओं को यह डर है कि बोलने से उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा, इसलिए वे इस मामले पर पूरी तरह शांत बैठे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि मौलवी द्वारा उत्तराखंड में अराजकता फैलाने, दंगा फसाद करने और पुराने इतिहास की बात कहकर माहौल खराब करने के प्रयास के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में मौलवी के खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसी गंभीर धाराओं और कानून के तहत अन्य कड़ी धाराओं को जोड़ने के लिए कानूनी स्तर पर बातचीत जारी है ताकि ऐसे तत्वों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई की जा सके।
















