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उत्तराखंड में अगस्त माह के दौरान घटी मानसूनी बारिश, पांच वर्षों में दर्ज हुई सबसे कम वर्षा

उत्तराखंड में अगस्त माह के दौरान घटी मानसूनी बारिश, पांच वर्षों में दर्ज हुई सबसे कम वर्षा

उत्तराखंड में इस वर्ष अगस्त के महीने में हुई कम मानसूनी बारिश ने लोगों और मौसम विज्ञानियों का ध्यान खींचा है। देहरादून एयरपोर्ट स्थित मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 के बाद इस बार अगस्त में सबसे कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इस स्थिति ने पर्यावरण प्रेमियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों के बीच चिंता के बादल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इससे भूजल स्तर और नदियों के जलस्तर पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

उत्तराखंड में अगस्त माह के दौरान घटी मानसूनी बारिश, पांच वर्षों में दर्ज हुई सबसे कम वर्षा

अगस्त में कितनी दर्ज हुई वर्षा

मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस वर्ष अगस्त माह के दौरान कुल 374.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यदि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो अगस्त 2020 में कुल 297.2 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इसके बाद के वर्षों यानी अगस्त 2021 में 566.4 मिमी, अगस्त 2022 में 434.1 मिमी, अगस्त 2023 में 745.8 मिमी, अगस्त 2024 में 693.5 मिमी और अगस्त 2025 में 986.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले पांच वर्षों के मुकाबले इस बार अगस्त का महीना सबसे कम बारिश वाला साबित हुआ है, जिससे पर्यावरणविदों में चिंता देखी जा रही है।

फसलों और जल स्तर पर प्रभाव

कम बारिश के बावजूद कृषि मोर्चे पर फिलहाल राहत की खबर है। जानकारों के अनुसार, इस न्यून वर्षा का धान और अन्य खरीफ की फसलों पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ा है। इसके अलावा जल संस्थान के सहायक अभियंता विनोद असवाल के अनुसार, यदि अगस्त माह में बारिश कम हुई है तो इससे नलकूपों पर फिलहाल कोई खास असर नहीं पड़ा है। बारिश के कारण किसान खेतों में सिंचाई आदि नहीं कर रहे हैं, जिससे नलकूपों को फिलहाल राहत मिली हुई है और पेयजल नलकूप भी ठीक प्रकार से काम कर रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र की तीन प्रमुख नदियों—सौंग, सुसवा और जाखन—में अभी तक काफी कम पानी आया है, जिससे भूजल पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

जुलाई की अच्छी बारिश और मॉनसून के कारण

गौरतलब है कि इस वर्ष मॉनसून का मिजाज मिलाजुला रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव, कमजोर मानसूनी हवाओं की धीमी रफ्तार और कम दबाव वाले क्षेत्रों के कमजोर होने का हवाला देते हुए पहले ही कमजोर मॉनसून की भविष्यवाणी की थी। हालांकि, कमजोर मॉनसून की भविष्यवाणी के बीच इस वर्ष जुलाई माह की बारिश ने पिछले वर्ष जुलाई का रिकॉर्ड जरूर तोड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई माह में दून एयरपोर्ट के मौसम विभाग ने कुल 499.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी, जबकि इस वर्ष जुलाई में कुल 570.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी पिछले जुलाई से इस बार जुलाई माह में करीब 71 मिलीमीटर बारिश अधिक दर्ज हुई थी, लेकिन अगस्त में आई अचानक कमी ने मौसम के पैटर्न में बदलाव को स्पष्ट कर दिया है।