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अमेरिकी सीनेट के 100% टैरिफ प्रस्ताव से भारतीय निर्यात पर मंडराया संकट, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिकी सीनेट के 100% टैरिफ प्रस्ताव से भारतीय निर्यात पर मंडराया संकट, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिकी सीनेट की ओर से भारतीय उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद भारत से होने वाले निर्यात को लेकर बड़ी चिंताएं सामने आ रही हैं। रूस से तेल की खरीद के मद्देनजर उठाए गए इस कदम से भारतीय व्यापार जगत में असमंजस की स्थिति बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है, तो अमेरिका को होने वाला निर्यात व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा।

अमेरिकी सीनेट के 100% टैरिफ प्रस्ताव से भारतीय निर्यात पर मंडराया संकट, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिका वर्तमान में भारतीय सामानों के लिए सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ हर साल लगभग 88 अरब डॉलर का निर्यात किया जाता है। मौजूदा समय में इन उत्पादों पर औसतन 10 प्रतिशत शुल्क लगता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक एवं सीईओ अजय सहाय के अनुसार, इस भारी-भरकम शुल्क से न केवल भारतीय निर्यात पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका में पहले से ही मौजूद महंगाई में और अधिक बढ़ोतरी हो जाएगी। अत्यधिक शुल्क लगने से भारतीय वस्तुएं अमेरिकी बाजार में अत्यधिक महंगी हो जाएंगी, जिससे उनकी बिक्री लगभग समाप्त हो सकती है।

निर्यातकों की चिंताएं और संभावित प्रभाव

चमड़ा उद्योग से जुड़े जानकारों का भी यही मानना है कि यदि यह शुल्क लागू हुआ, तो व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित होगा। हालांकि अभी खरीदार सामान्य रूप से व्यापार कर रहे हैं, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वर्तमान में फार्मास्यूटिकल्स और मोबाइल फोन जैसे प्रमुख भारतीय सामान या तो शुल्क मुक्त हैं या उन पर नाममात्र का दो से ढाई प्रतिशत शुल्क लगता है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव के तहत इन आवश्यक वस्तुओं को छूट मिलती है या नहीं। भारत फार्मा उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात अमेरिका को ही करता है। इसके अलावा, यदि मोबाइल फोन के निर्यात पर आंच आती है, तो देश के भीतर मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र और उससे जुड़े रोजगार पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है।