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शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार: मणिपुर के राहत शिविरों में हुई मौतों पर माँगा गया स्पष्टीकरण

शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार: मणिपुर के राहत शिविरों में हुई मौतों पर माँगा गया स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में हुई मौतों पर गुरुवार को गहरी हैरानी जताई। शीर्ष अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इन मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई और शिविरों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी दें।

शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार: मणिपुर के राहत शिविरों में हुई मौतों पर माँगा गया स्पष्टीकरण

राहत शिविरों की स्थिति पर तीखे सवाल

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने राज्य के शीर्ष अधिकारी से सवाल किया कि जस्टिस गीता मित्तल समिति द्वारा राहत शिविरों में हुई मौतों के बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने मुख्य शिविरों में हुई अस्वाभाविक मौतों और मामलों में बरती गई ढिलाई पर भी कड़ा रुख अपनाया है।

पोस्टमार्टम और मुआवजे पर उठाए गए मुद्दे

अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सामने आई कुल 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। इसके साथ ही, पीठ ने पूछा कि राहत शिविरों के दौरान अस्वाभाविक मौत का शिकार हुए विस्थापितों के परिजनों को केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया है।

प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश

न्यायालय ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को इस पूरे मामले पर एक अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्वाभाविक मौतों के सभी मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए। यह निर्देश जस्टिस मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद दिए गए हैं, जिसमें शिविरों में तीस से अधिक मौतें होने की बात सामने आई थी।