आलेख : अवधेश नौटियाल (वरिष्ठ पत्रकार)


कांग्रेस किसकी…?

गणेश गोदियाल की.?
प्रीतम सिंह की.?
हरक सिंह रावत की.?
हरीश रावत की.?
या फिर हाईकमान की.?
सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि 2027 अब दूर नहीं है और कांग्रेस ने चुनाव के लिए जिम्मेदारियां भी बांट दी हैं। गणेश गोदियाल प्रदेश अध्यक्ष हैं। प्रीतम सिंह चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और हरक सिंह रावत चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। यानी हाईकमान ने अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग भूमिका देकर चुनावी ढांचा तैयार किया है। गोदियाल के सामने चुनौती सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालने की नहीं, बल्कि इन तमाम राजनीतिक धाराओं को एक संगठनात्मक छतरी के नीचे लाने की भी है।
और यहीं से असली आईना शुरू होता है।अगर प्रदेश अध्यक्ष संगठन का औपचारिक नेतृत्व कर रहे हैं, तो क्या बाकी बड़े चेहरे उसी नेतृत्व के साथ एक स्पष्ट सामूहिक तस्वीर पेश कर पा रहे हैं?
कांग्रेस के भीतर कई बड़े चेहरे हैं। सभी का अपना राजनीतिक अनुभव, जनाधार और प्रभाव क्षेत्र है। लेकिन चुनावी राजनीति में सवाल यह होता है कि इन अलग-अलग प्रभावों को एक दिशा कौन देता है?
गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने पर्वतीय जिलों को जोन में बांटकर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां दीं। खुद गोदियाल ने भी एक जोन की कमान संभाली। यानी संगठनात्मक स्तर पर सामूहिक अभियान की संरचना बनाई गई है।
लेकिन दूसरी उत्तराखंड में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा निकाली जा रही ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ पर पार्टी हाईकमान ने सख्त आपत्ति जताई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी किसी भी नेता के व्यक्तिगत या समानांतर अभियान को स्वीकार नहीं करेगी।
यही सवाल खड़ा करता है कि क्या कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की एक धारा है या कई समानांतर धाराएं?
2022 में भी गोदियाल चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष थे। अब फिर उनके सामने चुनावी संगठन को संभालने की जिम्मेदारी है। इसलिए सवाल सिर्फ गोदियाल का नहीं है। सवाल उन तमाम नेताओं से भी है, जिनके कंधों पर कांग्रेस ने 2027 की जिम्मेदारी रखी है।
अगर छतरी एक है, तो बारिश में साथ खड़े होने में संकोच क्यों?
चेहरे कई हो सकते हैं… जिम्मेदारियां भी अलग हो सकती हैं… लेकिन चुनावी संगठन की दिशा क्या एक होगी?
यही वह आईना है, जिसमें 2027 से पहले उत्तराखंड कांग्रेस को खुद को देखना होगा।
छतरी गोदियाल के हाथ में है… अब सवाल यह नहीं कि छतरी कितनी बड़ी है, सवाल यह है कि उसके नीचे कितने लोग एक साथ खड़े होते हैं।


















