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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हल्द्वानी के वनभूलपुरा में कड़ा सुरक्षा पहरा, जानिए पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हल्द्वानी के वनभूलपुरा में कड़ा सुरक्षा पहरा, जानिए पूरा मामला

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित वनभूलपुरा में रेलवे भूमि से जुड़े अतिक्रमण मामले पर आने वाले सर्वोच्च अदालत के फैसले को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। इस कानूनी विवाद से हजारों परिवारों के घरों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हल्द्वानी के वनभूलपुरा में कड़ा सुरक्षा पहरा, जानिए पूरा मामला

कड़े सुरक्षा बंदोबस्त और प्रशासनिक निगरानी

संवेदनशील स्थिति और संभावित निर्णय के मद्देनजर पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए क्षेत्र को दो सुपर जोन और कई जोन में विभाजित किया गया है, जिसकी कमान वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारियों को सौंपी गई है। सुरक्षा बलों की विभिन्न टीमों के साथ-साथ निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, ताकि संवेदनशील जगहों, गलियों और छतों पर हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके। पुलिस ने चेतावनी दी है कि छतों या अन्य स्थानों पर पत्थर, ईंट, मलबा या हथियार जैसी वस्तुएं जमा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन ने संदिग्ध लोगों का सत्यापन करने के साथ फ्लैग मार्च भी निकाला है।

सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती

क्षेत्र की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इनमें पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ पीएसी की कंपनियां, अग्निशमन विभाग की यूनिट्स, यातायात पुलिस, बम निरोधक दस्ता, आंसू गैस के गोले दागने वाली टीमें, दंगा रोधी दल और फायरिंग दस्ते शामिल हैं। किसी भी आपात स्थिति या अफवाह से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकतानुसार अन्य संसाधन और वाहन भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जा सके।

क्या है पूरा रेलवे भूमि विवाद?

यह पूरा मामला रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा हुआ है। रेलवे का दावा है कि उसकी भूमि पर 4,365 परिवारों ने अतिक्रमण कर रखा है, जिससे लगभग 50 हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं। इनमें ज्यादातर मुसलमान परिवार शामिल हैं। इससे पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2022 में रेलवे की इस भूमि से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। प्रभावित लोगों ने उच्च न्यायालय के इस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिस पर अब फैसला आना है।

प्रशासन की शांति की अपील

स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने जनता से उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने तथा क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने, भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने तथा भड़काऊ बयानबाजी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन हर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।