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कुछ विदाइयाँ सिर्फ एक पद से नहीं होतीं…कुछ विदाइयाँ दिल में एक खालीपन छोड़ जाती हैं।

आलेख : देवराज फर्त्याल।

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह जी का कार्यकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। उनके जाने का समय करीब है, लेकिन उनके व्यक्तित्व और उनकी सीख की छाप उत्तराखंड की स्मृतियों में लंबे समय तक बनी रहेगी।

 

सीमा पर देश की रक्षा करने वाले एक सैनिक से लेकर देवभूमि उत्तराखंड के संवैधानिक प्रमुख तक की उनकी यात्रा केवल एक पद की यात्रा नहीं, बल्कि कर्तव्य, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की यात्रा रही है।

 

उन्होंने युवाओं को केवल भाषणों से नहीं, बल्कि अपने जीवन से यह संदेश दिया कि—

 

“सफलता पद से नहीं, आपके कर्तव्य और आपके चरित्र से तय होती है।”

 

राजभवन की गरिमा के साथ-साथ उन्होंने युवाओं, सैनिकों, पूर्व सैनिकों, महिलाओं, शिक्षा, संस्कृति और उत्तराखंड की लोक परंपराओं से जुड़े विषयों को महत्व दिया। यही वजह रही कि उनका व्यक्तित्व केवल राजभवन की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचा।

 

एक सैनिक के लिए देश सर्वोपरि होता है…

और एक राज्यपाल के लिए संविधान सर्वोपरि।

 

गुरमीत सिंह जी ने अपने जीवन के दोनों दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाकर यह दिखाया कि राष्ट्रसेवा का कोई पद नहीं होता—सेवा की भावना ही सबसे बड़ा पद है।

 

आज जब उनके कार्यकाल के कुछ ही दिन शेष हैं, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव का समय नहीं है।

यह उस व्यक्ति को धन्यवाद कहने का अवसर है, जिसने अपने लंबे सैन्य अनुभव, अनुशासन और सरल व्यवहार से उत्तराखंड के सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई।

 

पद आते हैं, पद जाते हैं…

लेकिन कुछ व्यक्तित्व अपनी छाप छोड़ जाते हैं।

 

गुरमीत सिंह जी भी उन्हीं व्यक्तित्वों में से एक हैं।

 

उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को आपका यह संदेश हमेशा याद रहेगा कि

देश के लिए जीने का जज़्बा उम्र नहीं देखता,

और समाज के लिए कुछ करने की इच्छा किसी पद की मोहताज नहीं होती।

 

आपने सीमा पर भारत की रक्षा की…

और राजभवन में रहकर देवभूमि के लोगों के बीच राष्ट्रसेवा की उसी भावना को आगे बढ़ाया।

 

आपका कार्यकाल समाप्त होगा,

लेकिन उत्तराखंड के साथ आपका रिश्ता और आपकी दी हुई प्रेरणा समाप्त नहीं होगी।

 

देवभूमि उत्तराखंड की ओर से

आदरणीय गुरमीत सिंह जी को हृदय से नमन और आभार। 🙏

 

आप जहां भी रहें, राष्ट्रसेवा की यह लौ यूं ही जलती रहे।

जय हिंद! 🇮🇳 जय उत्तराखंड! 🏔️

Lt Gen Gurmit Singh