आंध्र प्रदेश के पुत्तलुरू इलाके में पड़े भीषण सूखे की वजह से प्राकृतिक जल स्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि चित्रावती नदी में पानी पूरी तरह समाप्त हो गया है और वहां केवल रेत ही नजर आती है। जल अभाव की इस स्थिति ने स्थानीय जनजीवन और धार्मिक आयोजनों को भी प्रभावित किया है।


सूखी रेत पर हुई बप्पा की विदाई
क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत के चलते इस बार गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर एक अनोखा और विचलित करने वाला दृश्य देखने को मिला। पारंपरिक रूप से जिस चित्रावती नदी में हर साल गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया जाता था, इस बार वहां एक बूंद पानी भी मौजूद नहीं था। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण स्थानीय नागरिकों को मजबूरी में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को सूखी नदी की रेत पर ही छोड़कर विदा करना पड़ा।

सूखे और जल संकट के प्रमुख कारण
राज्य के कई हिस्सों में उत्पन्न हुए इन सूखे जैसे हालातों के पीछे मुख्य रूप से मानसून की भारी कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है। इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, वैश्विक जलवायु पैटर्न यानी अल नीनो के प्रभाव ने भी दक्षिणी भारत में बारिश की अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, जिससे इस क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है।

बारिश की लगातार कमी के चलते तालाबों और टैंकों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर बेहद नीचे चला गया है और भूजल का स्तर भी नहीं सुधर पाया है। कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए बोरवेलों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण लगभग 60 प्रतिशत बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके अतिरिक्त, जलाशयों के रखरखाव और जल प्रबंधन में कमियों के कारण पानी का उचित भंडारण और वितरण नहीं हो पाया, जिससे आम जनजीवन और कृषि क्षेत्र दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।


















