देहरादून। उत्तराखंड की सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि से जुड़े 7000 बीघा जमीन के मामले को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रदेश भर में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया । देहरादून में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया । दल ने मांग की कि उत्तराखंड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) को तत्काल भंग किया जाए तथा यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी जमीनों की प्रस्तावित अथवा चल रही नीलामी पर तत्काल रोक लगाई जाए।


उक्रांद ने कहा कि सरकारी भूमि केवल राजस्व का साधन नहीं, बल्कि प्रदेश की सार्वजनिक संपत्ति है। ऐसी भूमि से संबंधित किसी भी निर्णय में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित, स्थानीय नागरिकों के हित तथा पर्यावरणीय प्रभावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

दल ने मांग की कि सरकारी भूमि से संबंधित अब तक लिए गए निर्णयों, प्रस्तावों, नीलामी प्रक्रियाओं एवं आवंटनों की स्वतंत्र एवं पारदर्शी समीक्षा कराई जाए तथा संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय महामंत्री देवचन्द्र उत्तराखंडी ने कहा उत्तराखंड की सरकारी जमीन प्रदेश की जनता की सार्वजनिक संपत्ति है। इसे केवल व्यावसायिक उपयोग या नीलामी के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 7000 बीघा जमीन से संबंधित पूरी प्रक्रिया क्या है और इसमें जनहित को किस प्रकार सुरक्षित रखा जा रहा है।”
मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने कहा कि
यूआईआईडीबी के माध्यम से जमीनों के हस्तांतरण अथवा नीलामी से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए । उत्तराखंड की जमीनों की नीलामी किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।
तराई प्रभारी राजेंद्र बिष्ट ने कहा उत्तराखंड सीमित भू-संसाधनों वाला पर्वतीय राज्य है। यहां सरकारी भूमि का कोई भी हस्तांतरण दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखकर होना चाहिए। सरकार तत्काल यूआईआईडीबी से संबंधित जमीनों की प्रक्रियाओं पर रोक लगाए और पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करे।
मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष राकेश नेगी ने कहा उत्तराखंड क्रांति दल इस मुद्दे को केवल एक जमीन के मामले के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश की सार्वजनिक संपत्ति और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में देखता है। यदि सरकार हमारी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
उक्रांद की प्रमुख मांगें
यूआईआईडीबी को तत्काल भंग किया जाए।
यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी जमीनों की प्रस्तावित/चल रही नीलामी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
7000 बीघा जमीन से संबंधित पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं पारदर्शी समीक्षा कराई जाए।
सरकारी भूमि से संबंधित सभी प्रस्तावों, नीलामी प्रक्रियाओं और आवंटनों की जानकारी सार्वजनिक की जाए
सरकारी भूमि के हस्तांतरण से पहले स्थानीय हितों एवं पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए।
सरकारी जमीन को निजी व्यावसायिक हितों में जाने से रोकने के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी भूमि संरक्षण नीति बनाई जाए।
उत्तराखंड क्रांति दल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उत्तराखंड की सार्वजनिक संपदा हैं और इनके संबंध में लिए जाने वाले प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक जनहित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ज्ञापन देने में हीरा सिंह फर्स्वाण,देवेंद्र प्रसाद उनियाल,
जिलाध्यक्ष परवादुन प्रकोष्ठ सैनिक राजेंद्र सिंह रावत,
केंद्रीय प्रचार सचिव हरेन्द्र भंडारी, केंद्रीय महामंत्री संगठन सैनिक प्रकोष्ठ किशोर बहुगुणा आदि मौजूद रहे। ।
















