उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दौरे के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर देश की राजनीति में गहरा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इसके मूल में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और उसकी गहरी भेदभावपूर्ण मानसिकता जुड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के कृत्यों को केवल सफाई, खेद या शब्दों की बाजीगरी के जरिए छिपाया नहीं जा सकता है। थरूर ने जोर देकर कहा कि बहानों या शब्दों के जाल से इस बुनियादी समस्या की असलियत को बदला नहीं जा सकता है।


शशि थरूर का बीजेपी की विचारधारा पर गंभीर प्रहार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी या किसी आम आपसी खींचतान तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिन्होंने दशकों तक जनसेवा की है, उन्हें इस तरह के अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो कल्पना कीजिए कि पूरे भारत में आम दलित नागरिकों और बच्चों को रोजाना किस प्रकार की कठोर वास्तविकताओं और अपमान से गुजरना पड़ता होगा। थरूर के अनुसार, किसी प्रमुख दलित नेता के वहां से जाने के बाद इस तरह का ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान करना सीधे तौर पर छुआछूत का आचरण है। थरूर ने यह भी कहा कि इस घटना के दलित नागरिकों पर व्यापक असर पड़ते हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही से बचने नहीं देना चाहिए।

खरगे को न्याय का मतलब सभी दलितों को न्याय
शशि थरूर ने अपने बयान में दो टूक शब्दों में कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के लिए न्याय की मांग करना वास्तव में देश के प्रत्येक दलित नागरिक के लिए न्याय की मांग करना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस गंभीर घटना पर चुप नहीं बैठेगी। थरूर ने स्पष्ट किया कि ऐसा कृत्य असंवैधानिक, पूरी तरह से अस्वीकार्य है और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है। संविधान के तहत अपराध हमेशा अपराध ही रहता है, चाहे उसे किसी भी रूप में पेश करने की कोशिश क्यों न की जाए। उन्होंने इसके लिए ठोस कार्रवाई और न्याय की मांग की है।

राहुल गांधी ने की सख्त कार्रवाई की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने उत्तराखंड में इस कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की पुरजोर मांग की है। राहुल गांधी ने कहा कि इस प्रकार का कृत्य कानून का उल्लंघन है और यह एक अपराध है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी सवाल किया और कहा कि यह राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस मामले में पूरी जवाबदेही तय हो और उचित न्याय मिले।
















