उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के सबसे बड़े डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। यहां कान, नाक और गला (ईएनटी) विभाग में ऑपरेशन के लिए मरीजों को एक साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हाल ही में दिल्ली के एम्स अस्पताल से जुड़े मामलों के बीच इस तरह की स्थिति पर भी चर्चा हो रही है, जहां इलाज के अभाव और लंबी प्रतीक्षा सूचियों के कारण गंभीर परेशानियां सामने आती हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में वर्तमान में एक हजार से अधिक मरीज सर्जरी की प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं, जिससे दूरदराज से आने वाले जरूरतमंदों को खासी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


ईएनटी विभाग में लंबी प्रतीक्षा सूची और ओपीडी का दबाव
अस्पताल के ईएनटी विभाग में पूरे कुमाऊं क्षेत्र से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। रोजाना ओपीडी में दो सौ से अधिक मरीज आ रहे हैं, जिसके कारण सर्जरी की वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है। भारी दबाव के बीच डॉक्टर रोजाना औसतन आठ ऑपरेशन कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ रही नए मरीजों की संख्या के कारण यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। राहत की बात यह है कि आपातकालीन स्थिति में आने वाले गंभीर मरीजों को किसी प्रकार के इंतजार का सामना नहीं करना पड़ता है और उनका तुरंत इलाज किया जाता है, जिससे उन्हें संकट के समय राहत मिलती है.

मरीजों को मिल रही लंबी तारीखें और निजी अस्पतालों का खर्च
अधिकारियों और डॉक्टरों के अनुसार, वर्तमान में कान के ऑपरेशन के लिए मरीजों को करीब एक साल बाद की तारीख दी जा रही है। इसके अलावा, टॉन्सिल और थायराइड के ऑपरेशन के लिए भी मरीजों को चार से छह महीने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि निजी अस्पतालों में नाक, कान और गले के किसी भी ऑपरेशन पर कम से कम पचास हजार रुपये का खर्च आता है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार महंगे निजी अस्पतालों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्हें सरकारी अस्पताल की इस लंबी प्रतीक्षा सूची का ही सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि आयुष्मान योजना के तहत यहां इलाज निशुल्क किया जाता है, लेकिन समय पर ऑपरेशन की तारीख न मिलने से मरीज और उनके परिजन खासे परेशान हैं।

पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती और संसाधनों की मांग
विभाग के एचओडी डॉ. शहजाद का कहना है कि विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त टीम मौजूद है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के निर्धारित मानकों के मुताबिक विभाग में बारह पीजी, दो सीनियर रेजिडेंट, तीन असिस्टेंट प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर और एक प्रोफेसर तैनात हैं। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग को एक अतिरिक्त ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और कुछ जरूरी आधुनिक संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं, तो इस वेटिंग लिस्ट को आधा किया जा सकता है। संसाधनों के विस्तार से न केवल प्रतीक्षा अवधि कम होगी, बल्कि कुमाऊं भर से आने वाले हजारों मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा राहत भी मिल सकेगी।
















