उक्रांद ने SDM विकासनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

विकासनगर, 21 सितंबर 2026।

उत्तराखंड की बहुमूल्य सरकारी भूमि को UIIDB के माध्यम से नीलामी अथवा व्यावसायिक उपयोग में दिए जाने के प्रस्ताव के विरोध में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने आज उपजिलाधिकारी विकासनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया।

ज्ञापन के माध्यम से उक्रांद ने UIIDB को भंग करने, सरकारी भूमि की प्रस्तावित अथवा चल रही नीलामी पर तत्काल रोक लगाने तथा भूमि से संबंधित सभी निर्णयों की पारदर्शी समीक्षा किए जाने की मांग की। दल ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि, जल और प्राकृतिक संसाधन प्रदेश की सामूहिक धरोहर हैं और इनके संबंध में किसी भी निर्णय में जनहित तथा स्थानीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।
उक्रांद के केंद्रीय सह मीडिया प्रभारी प्रकाश भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की सार्वजनिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को निजी अथवा व्यावसायिक हितों के लिए उपयोग में देने से पहले सरकार को पूरी प्रक्रिया, भूमि का विवरण और उसके उद्देश्य को सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उक्रांद भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के सवाल पर जनता की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा तथा इस विषय पर लोकतांत्रिक संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा।
उक्रांद नेता अनिल पंवार ने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय जनता के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से भूमि की नीलामी, हस्तांतरण और प्रस्तावित व्यावसायिक उपयोग से संबंधित सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
उक्रांद नेता भूपेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड की सीमित भूमि और प्राकृतिक संसाधन आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि के व्यावसायिक उपयोग से पहले उसके सामाजिक, पर्यावरणीय और जनहित संबंधी प्रभावों का समुचित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने UIIDB की भूमिका की समीक्षा करते हुए सरकारी भूमि की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन कार्यक्रम में अतुल बेंजवाल, कार्यकारी अध्यक्ष; विपिन अन्थवाल, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष; सुमित राणा, जिला सचिव; बीना पंवार, सीमा कुकरेती, विनीता चौहान, राजेश्वर देवी, ऋतु ठाकुर, सुरेंद्र सिंह बिष्ट सहित उक्रांद के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उक्रांद ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि और प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े इस विषय पर जनता के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। पार्टी ने कहा कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उक्रांद जनहित में चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।
















