उत्तराखंड के विभिन्न बैंकों में लोगों की अपनी गाढ़ी कमाई जमा होने के बावजूद कोई इसे लेने आगे नहीं आ रहा है। राज्यभर के विभिन्न बैंकों और वित्तीय खातों में लगभग 550 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अनक्लेम्ड पड़ी हुई है। अकेले राजधानी देहरादून की बात करें तो वहां करीब साढ़े चार लाख निष्क्रिय खातों में लगभग 178 करोड़ रुपये जमा हैं। हालांकि, जिलावार आंकड़ों के अनुसार देहरादून में कुल अनक्लेम्ड रकम 256.33 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) के अनुसार इस लावारिस रकम को उसके असली हकदारों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बीते साल से लगातार एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक बेहद कम धनराशि ही खाताधारकों या उनके वारिसों को वापस लौटाई जा सकी है। बैंकों द्वारा लगातार खाताधारकों के पुराने मोबाइल नंबर और पते के माध्यम से संपर्क साधने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।


किन कारणों से खातों में फंस जाती है रकम?
बैंक अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक खातों में किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन न होना, खाताधारक की मृत्यु हो जाना या उनका पता व मोबाइल नंबर बदल जाना इस स्थिति के मुख्य कारण हैं। कई मामलों में तो कानूनी वारिसों को भी इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि उनके परिवार के किसी सदस्य का बैंक में कोई खाता या जमा राशि मौजूद है। ऐसे निष्क्रिय खातों की पहचान करके उनके सही वारिसों तक पहुंचने के लिए बैंक लगातार प्रयासरत हैं ताकि वे अपनी इस भूली हुई पूंजी को वापस पा सकें।

विभिन्न जिलों की स्थिति
उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में अनक्लेम्ड राशि का वितरण काफी भिन्न है। सबसे ज्यादा 256.33 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड रकम देहरादून में है। इसके बाद हरिद्वार में 88.13 करोड़ रुपये, पौड़ी में 52.32 करोड़ रुपये, पिथौरागढ़ में 30.54 करोड़ रुपये, नैनीताल में 26.53 करोड़ रुपये और टिहरी में 25.83 करोड़ रुपये की लावारिस राशि जमा है। इसके अलावा अन्य जिलों जैसे चमोली में 15.01 करोड़ रुपये, उत्तरकाशी में 13.11 करोड़ रुपये, ऊधमसिंह नगर में 11.98 करोड़ रुपये, बागेश्वर में 11.07 करोड़ रुपये, चंपावत में 9.41 करोड़ रुपये, रुद्रप्रयाग में 8.66 करोड़ रुपये और अल्मोड़ा में 1.08 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड राशि बैंकों में मौजूद है।

बीमा और म्यूचुअल फंड का पैसा भी शामिल
स्थिति सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के लोगों की करीब 50 करोड़ रुपये की रकम एलआईसी, म्यूचुअल फंड और शेयरों में भी अनक्लेम्ड बताई गई है। यानी एक बहुत बड़ा वित्तीय हिस्सा ऐसा है जिसके वास्तविक मालिकों या उनके वारिसों को इसकी कोई जानकारी नहीं है अथवा वे अब तक दावा करने के लिए आगे नहीं आए हैं।
यदि किसी व्यक्ति को अपनी ऐसी किसी जमा राशि या लावारिस पैसे के बारे में संदेह है, तो वे भारतीय रिजर्व बैंक के उद्गम पोर्टल पर जाकर इसकी जानकारी आसानी से तलाश सकते हैं। रकम मिल जाने की पुष्टि होने पर संबंधित बैंक की किसी भी शाखा में आवश्यक केवाईसी दस्तावेज और दावा फॉर्म जमा किया जा सकता है। कागजी कार्रवाई और पूरी तरह से सत्यापन होने के बाद यह फंसी हुई रकम वैध खाताधारक या उनके कानूनी वारिस को वापस लौटा दी जाती है।
















