देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच अब उत्तराखंड में भी एच1एन1 इन्फ्लूएंजा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संक्रमण के प्रसार पर समय रहते पूरी तरह काबू पाया जा सके। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं और उन्होंने आम जनता से भी पूरी तरह एहतियात बरतने की अपील की है ताकि इस बीमारी से बचा जा सके।


देहरादून में सामने आए मामले और मौतें
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अगस्त महीने की शुरुआत से लेकर मंगलवार तक केवल देहरादून जिले में स्वाइन फ्लू के कुल 49 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से पांच मरीजों की मौत की पुष्टि भी हुई है, हालांकि ये सभी पीड़ित अन्य गंभीर बीमारियों से भी पहले से ग्रसित थे। संक्रमित पाए गए कुल मरीजों में से 34 अकेले देहरादून जिले के स्थानीय निवासी हैं, जबकि 15 अन्य जिलों या राज्यों से अपना उपचार कराने के लिए देहरादून पहुंचे थे। राहत की बात यह है कि इनमें से 34 मरीज उपचार के पश्चात अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 10 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती रहकर अपना इलाज करवा रहे हैं।

अस्पतालों में तैयारी और आइसोलेशन वार्ड
संक्रमण के प्रसार को रोकने और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। अस्पतालों को अपने आइसोलेशन वार्ड पूरी तरह चालू रखने, जीवन रक्षक दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और नियमित डेटा रिपोर्टिंग करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए 10-10 बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। इसके अलावा, नैनीताल जिले में भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है और संदिग्ध मरीजों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल यानी एसटीएच में 20 बेड का एक विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।

बचाव और लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार, स्वाइन फ्लू से पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार, गले में खराश, खांसी, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और ठंड लगने जैसे सामान्य लक्षण महसूस हो सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी देखने को मिलती है। इससे बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना, खांसते या छींकते समय अपने मुंह व नाक को अच्छे से ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना और मास्क का उपयोग करना बेहद आवश्यक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, तेज बुखार, खांसी या सीने में तेज दर्द की शिकायत हो, तो उसे इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए तथा चिकित्सकीय सलाह से ही उचित दवाइयों का सेवन करना चाहिए।


















