उत्तराखंड वन विभाग में भारतीय वन सेवा (IFS) के एक वरिष्ठ अधिकारी की पदोन्नति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। एक नोटिस के माध्यम से यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारी ने लंबे समय से अपना अचल संपत्ति विवरण (IPR) दाखिल नहीं किया था, इसके बावजूद उन्हें वेतन मैट्रिक्स के लेवल-17 में पदोन्नति दे दी गई।


नियमों के उल्लंघन का आरोप
जारी नोटिस के मुताबिक, भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली के तहत अगले वेतन स्तर पर नियुक्ति पाने के लिए पिछले वर्ष का अचल संपत्ति विवरण 31 जनवरी तक देना अनिवार्य होता है। आरोप है कि अधिकारी ने कई वर्षों से IPR दाखिल नहीं किया था। इसके बावजूद उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और उन्हें पदोन्नत कर दिया गया। दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार के मॉड्यूल में भी कई वर्षों के लिए अधिकारी के नाम के सामने कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाया गया।

चयन समिति और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में चयन समिति की कार्यप्रणाली और तत्कालीन प्रमुख सचिव (वन) की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि चयन समिति की बैठक के दौरान IPR अनुपालन के मुद्दे पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया। इसके अलावा, जिन संवेदनशील पदों पर अधिकारी तैनात रहे, उन पर रहते हुए IPR न देने के मामलों को लेकर आय और संपत्ति के स्रोतों की जांच की आवश्यकता जताई गई है।


विभिन्न एजेंसियों से जांच की मांग
नोटिस में मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही, 45 दिनों के भीतर इस प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करने, तत्कालीन प्रमुख सचिव और चयन समिति के सदस्यों की भूमिका तय करने तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
















