उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम स्थल के तथाकथित शुद्धिकरण के मामले में नया मोड़ सामने आया है। इस प्रकरण में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले अमित कुमार की जाति और उपजाति को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय वाल्मीकि समाज ने इस संबंध में पुलिस थाने में एक आधिकारिक तहरीर दी है। वाल्मीकि समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने पुलिस को दी गई शिकायत में दावा किया है कि मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति का उनकी उपजाति से कोई संबंध नहीं है।


इस मामले में हल्द्वानी के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित सभी दस्तावेजों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इस बीच, इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति में भी उबाल देखा जा रहा है और विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के नेताओं ने भी इस मामले को लेकर अपनी बात रखी है और कहा है कि पूरे प्रकरण की सच्चाई दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आनी चाहिए।

कांग्रेस का प्रदर्शन और बसपा की कड़ी प्रतिक्रिया
हल्द्वानी की इस घटना के विरोध में राजधानी देहरादून में कांग्रेस पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने बैठक कर इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक कार्यक्रमों को इस तरह से जोड़ना और किसी आयोजन स्थल को अशुद्ध बताना लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारों के विपरीत है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में विचारों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन इस प्रकार की मानसिकता समाज में नफरत और भेदभाव को बढ़ावा देती है।

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस शुद्धिकरण विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पर ही तीखा निशाना साधा है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दोनों ही प्रमुख दल केवल दलितों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और अपना राजनीतिक हित साधने के लिए दलित प्रेम दिखा रहे हैं। उन्होंने अतीत की विभिन्न घटनाओं का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि बार-बार सत्ता में रहने के बावजूद इन दलों ने दलित समाज को उचित न्याय और सामाजिक सम्मान क्यों नहीं दिलाया। बसपा ने हल्द्वानी में हुई इस कथित घटना को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
मुख्यमंत्री का तीखा पलटवार
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में फैले कचरे और अन्य परिस्थितियों के बाद एक स्थानीय संस्था ने अपनी आस्था के अनुसार सामान्य प्रक्रिया अपनाई थी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अनावश्यक रूप से इसे जातिगत रंग देकर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब किसी का कोई अपमान हुआ ही नहीं है, तो विपक्ष बेवजह इस मुद्दे पर राजनीति करने में जुटा हुआ है। उनके अनुसार, झूठा नैरेटिव तैयार करना और जनता को भ्रमित करना एक पुराना राजनीतिक तरीका बन चुका है, जिससे आम जनता भली-भांति परिचित है और वह किसी भी तरह के दुष्प्रचार के बहкаवे में आने वाली नहीं है।
















