उत्तराखंड के चम्पावत जिले में सेब उत्पादन को एक नई दिशा देने के लिए किए जा रहे प्रयास अब पूरी तरह से रंग लाने लगे हैं। एप्पल मिशन के अंतर्गत विकसित किए गए आधुनिक हाई-डेंसिटी सेब बागानों में उत्पादकता पारंपरिक बागानों के मुकाबले लगभग 41 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई है। इस उल्लेखनीय बदलाव के कारण जिले में किसानों का रुझान व्यावसायिक खेती की तरफ काफी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है।


पारंपरिक और आधुनिक खेती की तुलना
उद्यान विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, चम्पावत जिले में करीब 190 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में पारंपरिक सेब के बागान स्थित हैं। इन पुराने और पारंपरिक बागानों से सालाना औसतन 360 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन प्राप्त होता है, और इनकी उत्पादकता लगभग 1.89 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर आंकी जाती है। इसके विपरीत, वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच एप्पल मिशन के तहत विकसित किए गए अल्ट्रा हाई-डेंसिटी (UHD) बागानों में यह उत्पादकता का आंकड़ा काफी बढ़कर 2.67 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

किसानों की भागीदारी और वित्तीय सहायता
चम्पावत जिले में अब तक कुल 79 किसानों ने आगे आकर इस आधुनिक सेब बागवानी मॉडल को अपने खेतों में सफलतापूर्वक अपनाया है। इसके माध्यम से लगभग 16.84 हेक्टेयर भूमि पर नए और उन्नत बागानों की स्थापना की गई है। इन नए विकसित बागानों से वर्तमान समय में लगभग 450 क्विंटल सालाना उत्पादन मिल रहा है। किसानों को इस आधुनिक खेती की ओर आकर्षित करने और आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के उद्देश्य से हाल ही में कुल 41 लाख रुपये की सब्सिडी राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

अत्याधुनिक तकनीक और उन्नत किस्में
कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधुनिक बागानों में विशेष रूप से एम-9 और एम-111 रूटस्टॉक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा इन पर गाला, किंग रोट और ग्रैनी स्मिथ जैसी उच्च गुणवत्ता वाली और बेहतरीन किस्मों को तैयार किया जा रहा है। कम भूमि के दायरे में अधिक पौधों का घनत्व रखना, ड्रिप सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल करना, सही पोषण प्रबंधन और अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों के निरंतर प्रयोग से ही इन बागानों की कुल उत्पादन क्षमता में यह भारी बढ़ोतरी संभव हो पाई है।
भविष्य की जरूरतें और संभावनाएं
एप्पल मिशन ने इस बात को स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है कि पारंपरिक बागवानी के तरीकों की तुलना में आधुनिक तकनीक का उपयोग करना किसानों की आय को बढ़ाने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बन सकता है। हालांकि, इस व्यवस्था की दीर्घकालिक सफलता के लिए यह भी बेहद जरूरी है कि किसानों को लगातार प्रशिक्षण दिया जाए, बेहतर स्टोरेज और भंडारण की व्यवस्था हो, तथा उनके उत्पादों के लिए मार्केटिंग की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इन सभी व्यवस्थाओं के मिलने से बढ़े हुए उत्पादन का सीधा और वास्तविक आर्थिक फायदा किसानों की आमदनी में साफ तौर पर दिखाई देगा।

















