उत्तराखंड के रुद्रपुर में आगामी 20 सितंबर को बंगाली समाज का एक बड़ा महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस आगामी आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने और चर्चा करने के लिए उधम सिंह नगर के दिनेशपुर स्थित हरिचंद-गुरुचंद मंदिर में प्रादेशिक बंगाली कल्याण समिति की तरफ से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में समिति के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया।


प्रादेशिक बंगाली कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक के दौरान समाज के लोगों से आगामी महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया गया। आयोजकों का मानना है कि लोगों की भारी उपस्थिति से यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल हो सकेगा। बैठक में महासम्मेलन के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों और समाज से जुड़ी लंबित मांगों पर भी काफी देर तक गंभीर विचार-विमर्श किया गया, ताकि सरकार के समक्ष इन विषयों को प्रभावी ढंग से रखा जा सके।

अनुसूचित जाति के दर्जे की प्रमुख मांग
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने विशेष रूप से यह जानकारी साझा की कि बंगाली समाज के अंतर्गत आने वाले नमःशूद्र समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग बहुत लंबे समय से लंबित पड़ी है। उनका कहना था कि देश के कई अन्य राज्यों में इस समुदाय के लोगों को पहले से ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, लेकिन उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में यह महत्वपूर्ण मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे समाज के लोगों में चिंता बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, बंगाली समाज अपने इस अधिकार को हासिल करने के लिए पिछले लगभग छह दशकों से लगातार संघर्ष कर रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को पूर्व में विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर भी पूरी मजबूती के साथ उठाया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसी लंबी अनिश्चितता और समाधान न मिलने की स्थिति के कारण समाज के भीतर लंबे समय से असंतोष व्याप्त है, जिसे इस महासम्मेलन के माध्यम से फिर से मुखर किया जाएगा।
बांग्ला भाषा की शिक्षा का मुद्दा
अनुसूचित जाति के दर्जे की मांग के अतिरिक्त, बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी 20 सितंबर को रुद्रपुर में आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन में शिक्षा से जुड़ा एक अन्य बड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। समिति के सदस्यों के अनुसार, बंगाली बहुल क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था शुरू करने की मांग को भी सरकार के समक्ष मजबूती के साथ रखा जाएगा।
समिति के पदाधिकारियों का यह मानना है कि इन सभी पुराने और लंबित विषयों को लेकर शासन तथा प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए यह महासम्मेलन एक बड़ा मंच साबित होगा। बैठक के अंत में सभी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम की तैयारियों के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं ताकि 20 सितंबर को होने वाले इस आयोजन को पूरी तरह सफल बनाया जा सके।

















