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उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज मंडुवा और झंगोरा पर वैज्ञानिकों का शोध

उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज मंडुवा और झंगोरा पर वैज्ञानिकों का शोध

पहाड़ों की थाली में पारंपरिक रूप से शामिल रहने वाले मंडुवा और झंगोरा जैसे मोटे अनाजों की पौष्टिकता को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू हो गए हैं। देश में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या पर काबू पाने के लिए यह शोध बेहद अहम माना जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान में इन पारंपरिक अनाजों पर काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके परिणाम स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी मददगार साबित होंगे।

उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज मंडुवा और झंगोरा पर वैज्ञानिकों का शोध

राष्ट्रीय पोषण संस्थान में चल रहा है विशेष अध्ययन

उत्तराखंड के परंपरागत मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता लगाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इन अनाजों के पोषक तत्वों का सटीक आकलन होने से भविष्य में स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाएगा। इसके अलावा फिंगर मिलेट के सेवन से एनीमिया जैसी समस्या पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का आकलन करने के लिए भी विश्लेषणात्मक और नैदानिक अध्ययन किए जा रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिकों के साथ संवाद और विभिन्न प्रयोगशालाओं का मुआयना भी किया गया है।

खानपान और जीवनशैली पर व्यापक सर्वे

स्वास्थ्य और खानपान की आदतों को बेहतर ढंग से समझने के लिए बड़े स्तर पर संपदा सर्वे किए गए हैं। इन सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में घरों की जीवनशैली और खानपान का अध्ययन किया गया है, जिसके आधार पर संस्थान अपने महत्वपूर्ण सुझाव केंद्र सरकार को देगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि महिला के गर्भधारण के पूर्व ही पोषण पर उचित ध्यान दिया जाए, तो आने वाला बच्चा अधिक स्वस्थ हो सकता है। इसके अलावा, शुरुआती दो साल तक के बच्चे को चीनी या शुगर नहीं देने की बात कही गई है।

दैनिक आहार और नमक का सही उपयोग

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दैनिक खानपान में संतुलन होना बहुत जरूरी है। बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के नमक जैसे सेंधा नमक, पिंक नमक या रॉक सॉल्ट में सोडियम की मात्रा लगभग एक समान ही होती है। इसलिए आयोडीन युक्त नमक का उपयोग ही बेहतर है, बशर्ते इसका सेवन एक दिन में पांच ग्राम से अधिक न हो। इसी प्रकार शक्कर, गुड़ या चीनी की मात्रा भी सीमित यानी प्रतिदिन चार से पांच टी-स्पून के बीच ही रखी जानी चाहिए। एक स्वस्थ आहार श्रेणी में रोजाना करीब दो हजार कैलोरी की थाली को उपयुक्त माना गया है जिसमें फल, सब्जी, दाल और अन्न शामिल हैं।

स्वस्थ जीवनशैली के लिए जरूरी कदम

रोजमर्रा की जीवनशैली को बेहतर बनाए रखने के लिए शारीरिक सक्रियता को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन लगभग साढ़े सात हजार से साढ़े आठ हजार कदम चलना पर्याप्त माना गया है। इसके अलावा शरीर में विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए दिन की धूप में कुछ समय बिताना जरूरी बताया गया है, जबकि विटामिन बी-12, दूध और अंडे के सेवन को भी सेहत के लिए बेहद कारगर माना गया है।