भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए लिखित हलफनामे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के अंतर्गत नाम जोड़ने या हटाने के विरुद्ध आई 37 लाख से ज्यादा अपीलें अभी तक पेंडिंग हैं। आयोग के आंकड़े दर्शाते हैं कि ट्रिब्यूनल के पास कुल 38,20,683 याचिकाएं आई थीं, जिनमें से केवल 1,02,231 मामलों का ही अब तक समाधान निकाला जा सका है और 37,18,452 मामले अभी भी विचाराधीन हैं। हालांकि, आयोग के इस जवाब में उन लोगों की अपीलों का विस्तृत ब्योरा शामिल नहीं किया गया जिनके नाम हटाए गए थे या जो सूचियों में नाम शामिल करने के खिलाफ थीं।


अदालत का निर्देश और याचिका
शीर्ष अदालत ने गत 25 अगस्त को चुनाव आयोग को यह आदेश दिया था कि वह मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की चुनौतियों से जुड़ी अपीलों की पेंडेंसी और उनके निस्तारण का पूरा डेटा प्रस्तुत करे। इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी पूछा था कि इन मामलों के समाधान की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और इसके वास्ते अतिरिक्त कितने ट्रिब्यूनल की आवश्यकता है। इससे पहले जुलाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी और आयोग से जवाब मांगा था। याचिका में मांग की गई थी कि एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं के दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।

बोस की याचिका के अनुसार, गणना के चरण में करीब 58 लाख मतदाताओं को बाहर कर दिया गया था। दावे और आपत्तियों के दौर में नाम जुड़वाने के वास्ते 9.64 लाख से अधिक आवेदन यानी फॉर्म 6 और 6ए तथा नाम हटाने के वास्ते 99,000 से अधिक आवेदन यानी फॉर्म 7 प्राप्त हुए थे, मगर 28 फरवरी को आई अंतिम मतदाता सूची में केवल 1.82 लाख नाम ही जुड़ पाए थे। इसके अलावा, अप्रैल के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया था कि वे एसआईआर के बाद नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई चाहने वाले लोगों की अर्जियों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करें।

दावे, आवेदन और ट्रिब्यूनल का गठन
न्यायालय में पेश किए गए आंकड़ों के आधार पर, मसौदा मतदाता सूची के आने के पश्चात 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म 6 के जरिए 34.13 लाख आवेदन दाखिल किए गए थे। इन आंकड़ों में नए पंजीकरण वाले नागरिकों के साथ वे लोग भी शामिल थे जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए जा चुके थे। कुल लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए शुरुआत में लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। तत्पश्चात, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और जजों की अध्यक्षता में कुल 19 ट्रिब्यूनल स्थापित किए गए ताकि इन अपीलों पर फैसले लिए जा सकें।


















