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देहरादून में साइबर ठगी: रिटायर्ड प्रिंसिपल को 24 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 73 लाख रुपये ठगे

देहरादून में साइबर ठगी: रिटायर्ड प्रिंसिपल को 24 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 73 लाख रुपये ठगे

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर अपराधियों का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ठगों ने एक सेवानिवृत्त महिला प्रिंसिपल को करीब 24 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान आरोपियों ने महिला को इस तरह भयभीत कर दिया कि वह अपने घर में रहने वाले डॉक्टर बेटे को भी इस घटना की जानकारी नहीं दे पाईं। ठगों ने इस पूरी अवधि के दौरान कुल 73.60 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

देहरादून में साइबर ठगी: रिटायर्ड प्रिंसिपल को 24 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 73 लाख रुपये ठगे

मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के नाम पर डराया

घटना की शुरुआत पिछले महीने आठ अगस्त को हुई थी, जब साइबर ठगों ने महिला को पहली बार फोन किया। आरोपियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके पहचान पत्र पर जारी किए गए सिम कार्ड का उपयोग करके करोड़ों रुपये का घपला किया गया है। इस फर्जी मामले में जांच और क्लीयरेंस के नाम पर ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 73.60 लाख रुपये जमा करवा लिए। आरोपियों ने महिला को विश्वास दिलाया था कि जांच पूरी होने तक उनकी यह पूरी राशि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास सुरक्षित रहेगी। इसी डर के माहौल में महिला आठ से 31 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट रहीं, जबकि कानून में इस तरह की किसी भी गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है।

खौफ के साये में बीते 24 दिन और डॉक्टर बेटे से छुपाना

ठगों की ओर से बनाए गए भारी मानसिक दबाव के कारण पीड़िता पर डर इस कदर हावी था कि उन्होंने घर में रहने वाले डॉक्टर बेटे को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। हालांकि महिला के पति ने शक होने पर इसे ठगों का गिरोह बताकर चेताया भी था, लेकिन आरोपी जांच एजेंसियों जैसा फर्जी दफ्तर बनाकर और पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल करते थे जिससे महिला पूरी तरह सहम गई थी। जब बेटे को इस पूरे घटनाक्रम का पता चला तो उसने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद देहरादून साइबर अपराध थाने में तहरीर दी गई, जहाँ प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र नबियाल ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।

साइबर ठगी से बचाव और ऑनलाइन शिकायत

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती एक घंटा पीड़ित के लिए बेहद अहम होता है। यदि सही जगह पर समय पर शिकायत दर्ज हो जाए तो ठगी गई रकम को फ्रीज कराया जा सकता है। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ साइबर टीम ने इसके लिए एक साइबर एंड डिजिटल इन्वेस्टिगेशन पोर्टल हब बनाया है, जहाँ एक ही जगह पर जरूरी लिंक उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस लगातार नागरिकों को ऐसे फर्जी फोन कॉल और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहने की अपील कर रही है।