उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पार्टी के विभिन्न पदों से हटने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे नहीं चाहते कि उनके किसी भी सहयोगी या पूर्व घटनाक्रम से भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रही पार्टी की छवि पर कोई असर पड़े। वे वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के पदों से विनम्रतापूर्वक हटने का निर्णय लिया है ताकि पार्टी का संघर्ष कमजोर न पड़े।


जांच एजेंसी ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 2016 की एक पुरानी परीक्षा से जुड़े घोटाले के मामले में पूर्व सीएम के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की थी। राजधानी में हुए इस एक्शन के दौरान पूर्व ओएसडी समेत आयोग के पूर्व अफसरों के कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई, जिसमें संपत्ति, नगदी, आभूषण और मोबाइल जब्त किए जाने की बात सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है, जहां विपक्षी दल इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने छोड़े सांगठनिक पद और राजनीतिक हलचल
घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस घटना को एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे रावत इन दिनों दिल्ली में रहते हुए अपना उपचार करा रहे हैं। वर्ष 2017 और उसके बाद 2022 के चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद से उनके लिए स्थितियां अधिक अनुकूल नहीं रही हैं, और पार्टी के भीतर भी उनके खिलाफ कई मोर्चे खुले रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को संदेह के दायरे में बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों से विपक्ष को दबाया नहीं जा सकता और पार्टी हर स्तर पर इसका मुकाबला करेगी।

पुराने राजनीतिक घटनाक्रम और स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा
उत्तराखंड की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब हरीश रावत किसी बड़े विवाद या राजनीतिक संकट से घिरे हों। इससे पहले वर्ष 2016 में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब एक कथित स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था, जिसके कारण राज्य की राजनीति में भारी भूचाल आ गया था। उस दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों और बागी विधायकों के मामले में काफी राजनीतिक उठापटक हुई थी। एक निजी समाचार चैनल द्वारा जारी किए गए उस वीडियो में दावा किया गया था कि सरकार को बचाने के लिए पैसों के लेन-देन की बात हो रही है। इस मामले के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी और बाद में अदालती हस्तक्षेप व फ्लोर टेस्ट के बाद रावत सरकार गिर गई थी। इस मामले में बाद में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर पूछताछ भी की थी। वर्तमान घटनाक्रम के बाद राज्य में राजनीतिक दलों के बीच एक बार फिर से पुरानी और नई घटनाओं को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
















