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उत्तराखंड में बंद मदरसों के बच्चों का ब्योरा तलब, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शुरू की कवायद

उत्तराखंड में बंद मदरसों के बच्चों का ब्योरा तलब, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शुरू की कवायद

उत्तराखंड में बंद हो चुके मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (MEA) ने जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने सभी जिलों से बंद मदरसों में पंजीकृत बच्चों का विस्तृत विवरण तलब किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संस्थानों के बंद होने के बाद उन बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ा।

उत्तराखंड में बंद मदरसों के बच्चों का ब्योरा तलब, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शुरू की कवायद

संचालकों से मांगी गई अंडरटेकिंग और रिपोर्ट

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने सभी जिलों में बंद मदरसों की अंडरटेकिंग लेने के सख्त निर्देश दिए हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों के माध्यम से संचालकों को नोटिस जारी कर बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। देहरादून समेत विभिन्न जिलों में इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

विद्यार्थियों के वैकल्पिक शिक्षण पर जोर

विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल बंद हो चुके संस्थानों की संख्या गिनना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि वहां अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा आगे जारी रही या वे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुए। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया गया था कि संस्थान बंद होने के बाद विद्यार्थियों का क्या हुआ और क्या उन्हें किसी अन्य शिक्षण संस्थान में प्रवेश मिला या नहीं।

उत्तराखंड में बंद मदरसों के बच्चों का ब्योरा तलब, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शुरू की कवायद

शैक्षणिक निरंतरता और जवाबदेही

जानकारों का मानना है कि सत्र के बीच में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। प्राधिकरण की इस नई रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि बंद हुए मदरसों के प्रत्येक बच्चे को वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिला या नहीं। इस पूरी कवायद का उद्देश्य बाल शिक्षा और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना है।